दैनिक भास्कर हिंदी: अब मोबाइल से देख सकेंगे ई-चालान ,महा ट्रैफिक एप पर मिलेगी जानकारी

September 5th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महाराष्ट्र शासन राज्य में वन स्टेट वन ई-चालान प्रकल्प को कार्यान्वित करने का आदेश दे चुका है। इसके अंतर्गत कसूरवार वाहन चालकों पर कार्रवाई की जा रही है। अब नागरिक अपने मोबाइल पर अपना ई-चालान देखकर भर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने मोबाइल पर महा ट्रैफिक नामक एप को डाउनलोड करना होगा। इस एप को राज्य के हर जिले में संबंधित विभाग के लिए लागू किया गया है। इसके लिए संबंधित विभाग में वरिष्ठ अधिकारी और नोडल ऑफिसर की नियुक्ति की गई है। महामार्ग पुलिस प्रादेशिक विभाग नागपुर के पुलिस निरीक्षक राजा पवार ने बताया कि वन स्टेट वन ई-चालान नामक प्रकल्प को संपूर्ण महाराष्ट्र में तीन माह पहले ही शुरू किया गया है।

नागरिकों की सुविधा के लिए महा ट्रैफिक एप नामक मोबाइल एप बनाया गया है। इस एप में माई व्हीकल और माई ई-चालान व पेमेंट की सुविधा दी गई है। इसे नागरिक अपने मोबाइल फोन पर प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इस एप में वाहन चालक को उस पर लगाए गए दंड की जानकारी आसानी से मिल सकती है। नागरिकों को इस एप को डाउनलोड करने के बाद अपना रजिस्ट्रर्ड मोबाइल नंबर, वाहन नंबर, चेचिस नंबर और इंजन नंबर डालना होगा तभी उसे यह पता चल सकेगा कि उसे चालान के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इस बारे में राज्य यातायात पुलिस अधीक्षक मुख्यालय के अपर पुलिस महासंचालक विजय पाटील ने अगस्त माह में आदेश जारी किया है।

राज्य के 10 पुलिस आयुक्तालयों में लागू

सूत्रों ने बताया कि राज्य के 10 पुलिस आयुक्तालयों के अंतर्गत वहां के शहरों में वन स्टेट वन ई-चालान पद्धति को लागू किया गया है। नागपुर, अमरावती, पुणे, नाशिक, औरंगाबाद, मुंबई, ठाणे, सोलापुर, नई मुंबई व पिंपरी चिंचवड आदि शहरों में इसे लागू किया गया है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसे लागू किया जा चुका है। इसमें नागपुर ग्रामीण, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, यवतमाल, वाशिम, औरंगाबाद ग्रामीण, बीड, जालना, उस्मानाबाद, नांदेड, लातूर, परभणी, हिंगोली, कोल्हापुर, पुणे, सांगली, सतारा, भंडारा, चंद्रपुर, गड़चिरोली, गोंदिया, वर्धा, अहमदनगर, धुले, जलगांव, नाशिक, नांदूरबार, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, ठाणे, पालघर आदि शहरों के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही महामार्ग पुलिस विभाग के अधीक्षक को भी इस बारे में जानकारी दी जा चुकी है। 

राज्य में हर साल 27 लाख लाइसेंस बनते हैं

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में हर साल करीब 25 से 27 लाख लाइसेंस बनते हैं। इसमें करीब 15 लाख लर्निंग और 10 से 12 लाख विविध तरह के लाइसेंस बनाए जाते हैं। यह लाइसेंस देने के लिए राज्य में 50 प्रादेशिक और उपप्रादेशिक परिवहन बनाए गए हैं। व्यावसायिक उपयोग के लिए अब 3 वर्ष के बजाय नवीनीकरण की समयावधि 5 वर्ष कर दी गई है। केमिकल टैंकर के नवीनीकरण की समय सीमा 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष किए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है। सूत्र बताते हैं कि ऑटो रिक्शा  लाइसेंस के लिए आवेदन से उम्र के उल्लेख का कॉलम निकाल दिया गया है।

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