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गोंदिया भेजे गए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक, तो कोथमिरे गड़चिरोली

गोंदिया भेजे गए एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक, तो कोथमिरे गड़चिरोली

डिजिटल डेस्क, मुंबई। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर दया नायक का तबादला गोंदिया कर दिया गया है। आतंकवाद निरोधक दस्ते की जुहू यूनिट में तैनात दया नायक का तबादला गोंदिया जिला जाति प्रमाणपत्र समिति में तबादला किया जा रहा है। यानी नायक का सिर्फ तबादला ही नहीं किया गया बल्कि उनको साइड पोस्टिंग भी दे दी गई। एक दूसरे विवादित पुलिस इंसपेक्टर राजकुमार कोथमिरे को ठाणे से गडचिरोली पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय में भेजा गया है।  सचिन वाझे मामले के बाद मुंबई की अपराध शाखा और दूसरी जगहों पर सालों से तैनात पुलिस अधिकारियों का लगातार तबादला किया जा रहा है। 80 एनकाउंटर कर चुके नायक प्रदीप शर्मा के एनकाउंटर स्क्वाड में थे। नायक को अंडरवर्ल्ड से रिश्ते और भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद निलंबित कर दिया गया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने नायक को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन बाद में अदालत से बरी होने के बाद उन्हें फिर 2012 में बहाल कर दिया गया। बहाली के बाद दो साल बाद नायक का तबादला नागपुर में किया गया था लेकिन वे वहां नहीं गए। जिसके चलते उन्हें 2014 में फिर निलंबित कर दिया गया।

बाद में 2016 में फिर बहाल कर नायक को पहले मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में और बाद में एटीएस में तैनात कर दिया गया। लेकिन वाझे मामले में सरकार और मुंबई पुलिस की जिस तरह बदनामी हुई उसके बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में कई सालों से तैनात पुलिसकर्मियों के तबादला शुरू हुआ। वाझे प्रकरण के बाद पिछले महीने मुंबई पुलिस की अपराध शाखा में तैनात 65 पुलिस अधिकारियों समेत 86 पुलिस अधिकारियों का एक ही दिन तबादला कर दिया गया था। दो दिनों पहले ही मुंबई में लंबे समय से तैनात पुलिस अधिकारियों नंदकुमार गोपाले, सुधीर दलवी, सचिन कदम, केदारी पवार और ठाणे में तैनात नितिन ठाकरे का मुंबई से दूर तबादला कर दिया गया था। गोपाले को जालना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, पवार को जलगांव, कदम को औरंगाबाद और ठाकरे को नंदुरबार भेजा गया है। इससे पहले आर्थिक अपराध शाखा में 5 साल से ज्यादा समय बिता चुके 13 अधिकारियों को भी वहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।