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गृहमंत्री देशमुख के खिलाफ फडणवीस ने पेश किया विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, चव्हाण के खिलाफ भी नोटिस 

गृहमंत्री देशमुख के खिलाफ फडणवीस ने पेश किया विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, चव्हाण के खिलाफ भी नोटिस 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया है। मुख्यमंत्री रहते अन्वय नाईक आत्महत्या मामले को दबाने के गृहमंत्री अनिल देशमुख के दावे से मामले में फडणवीस ने यह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया। फडणवीस ने सार्वजनिक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ भी विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है।   

महाराष्ट्र विधानसभा नियम 273 के तहत विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश करते हुए फडणवीस ने कहा कि 9 मार्च 2021 को विपक्ष के नेता मनसुख हिरेन की मौत के मामले में पुलिस अधिकारी सचिव वझे के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसी दौरान गृहमंत्री ने कहा था कि अन्वय नाईक की हत्या हुई थी यह शिकायत उनकी पत्नी अक्षता और बेटी आज्ञा ने की। गृहमंत्री ने दो बार कहा कि मुख्यमंत्री रहते देवेंद्र फडणवीस ने यह मामला दबाया।

फडणवीस ने कहा कि मैं साफ करना चाहता हूं कि अन्वय नाईक की हत्या नहीं हुई, बल्कि पुलिस की जांच में साफ हुआ कि उन्होंने आत्महत्या की थी। उनकी पत्नी और बेटी ने कहा था कि व्यवसाय में बकाया रकम न मिलने के चलते उन्होंने आत्महत्या की थी। उस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि मामले में तथ्यों को देखने के बाद यह नहीं लगता कि अपील करने वाला आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी है।

अदालत ने पुलिस की जांच में भी कोई कमी नहीं पाई थी ऐसे में मामले को दबाने के आरोपों में कोई तथ्य बचता। यही नहीं ऐसा कहना सर्वोच्च न्यायालय का अपमान है। गृहमंत्री को यह पता था इसके बावजूद जान बूझकर उन्होंने मेरी बदनामी करने वाला, सर्वोच्च न्यायालय का अपमान करने वाला और सदन को गुमराह करने वाला बयान दिया है। साथ ही इस बयान के जरिए मुझ पर दबाव डालने की कोशिश की है। 

फडणवीस ने कहा कि विपक्ष का नेता होने के नाते सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने की  जिम्मेदारी पूरी करते समय अड़चन डालने और मुझे अपने अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई। उन्होंने विधानसभा में पीडब्लू़डी मंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ भी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश करने की इजाजत उपाध्यक्ष से मांगी लेकिन संसदीय कार्यमंत्री अनिल परब और दूसरे सदस्यों ने यह कहते हुए विरोध किया कि पहले इसके लिए नोटिस नहीं दी गई है। इसके बाद फडणवीस ने कहा कि वे नोटिस देने के बाद यह प्रस्ताव पेश करेंगे। 

चव्हाण ने दी सदन में गलत जानकारी  

विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि मराठा आरक्षण पर अशोक चव्हाण ने गुमराह करने वाली जानकारी सदन में दी है। उन्होंने कहा कि 102वे संविधान संशोधन का उल्लेख सर्वोच्च न्यायलय में मुकुल रोहतगी ने किया था। केंद्र सरकार के अटार्नी जनरल ने जो नहीं कहा उसे सदन में बताया गया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में साफ किया है कि 102वें संविधान संशोधन का असर राज्य के कानून पर नहीं पड़ेगा। लेकिन चव्हाण मराठा समाज को गुमराह करते हुए अपने अज्ञान का प्रदर्शन कर रहे हैं। 
 

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