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पीएनबी रामपुर से निकाला 80 लाख का फर्जी लोन -गारंटर को शराब पिलाकर कराए हस्ताक्षर 

पीएनबी रामपुर से निकाला 80 लाख का फर्जी लोन -गारंटर को शराब पिलाकर कराए हस्ताक्षर 

डिजिटल डेस्क जबलपुर। ग्वारीघाट रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रामपुर शाखा से फर्जीवाड़ा कर 80 लाख का लोन जारी कर दिया गया। इस मामले में बैंक प्रबंधन द्वारा विभागीय जाँच कर शिकायत गोरखपुर थाने में दी गयी है। उक्त शिकायत पर जल्द ही मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी जाएगी। इस मामले में सबसे रोचक बात यह है कि वर्ष 2017 में जनरेटर खरीदी के नाम पर लोन दिए जाने में तत्कालीन बैंक अधिकारी भी शामिल थे। वहीं गारंटर को शराब पिलाकर बैंक गारंटी के दस्तावेजों में हस्ताक्षर कराए गये थे। 
बैंक मैनेजर की अनुशंसा पर दिया गया था लोन
 सूत्रों के अनुसार बैंक से 80 लाख का लोन निकाले जाने में हुए फर्जीवाड़े के संबंध में वर्तमान में पदस्थ बैंक मैनेजर द्वारा की गयी शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2017 में मदर टेरेसा नगर निवासी अभिषेक सिंह राजपूत पिता नरेश राजपूत द्वारा बैंक में लोन का आवेदन किया गया था। आवेदक ने जो दस्तावेज लगाए थे उनमें उसने खुद को टैंक हाउस व्यापारी बताया था और जनरेटर खरीदी के लिए लोन लेने के लिए आवेदन किया था। उसने 55 लाख रुपये टर्म लोन व सीसी मिलाकर कुल 80 लाख का लोन लिया था। यह लोन तत्कालीन बैंक मैनेजर अभय सिन्हा के कार्यकाल में पवन कुमार की अनुशंसा पर दिया गया था। लोन संबंधी दस्तावेजों में गारंटी के तौर पर राजा राम पिता पेजराम निवासी कचनारी के हस्ताक्षर कराए गये थे। गारंटर से जब इस संबंध में पूछताछ की गयी तो उसने बैंक अधिकारियों को बताया कि उसे शराब पिलाकर नशे की हालत में उससे हस्ताक्षर कराए गये थे। 
6 माह तक जारी किए नोटिस 
जाँच अधिकारी ने बताया कि बैंक प्रबंधन द्वारा आवेदक अभिषेक सिंह को विगत 6 माह से नोटिस भेजकर बैंक में आने के लिए कहा जा रहा है लेकिन न तो वह बैंक आया और न ही लोन से लिया गया जनरेटर दिखाया गया। वहीं जाँच में आवेदक द्वारा एवोन कंपनी का बिल लगाया गया था जो कि फर्जी निकला क्योकि उक्त कंपनी की शहर में कोई ब्रांच ही नहीं है। इस लोन में फर्जीवाड़ा की आशंका नजर आने पर बैंक मैनेजर द्वारा बैंक के सर्किल इंजार्च को पूरी प्रकिया से अवगत कराया गया और फिर गोरखपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गयी। टीआई उमेश तिवारी  का कहना है कि शिकायत की जाँच कर  जल्द ही मामला दर्ज किया जाएगा। 
मामले को दबाने का प्रयास 
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर एक फर्जी शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी भेजी गयी है। जिसमें तत्कालीन बैंक मैनेजर अभय सिन्हा और पवन कुमार के फर्जीवाड़े और लोन डिफाल्ट होने के ऐसे कई मामलों को दबाने का जिक्र किया गया है, साथ ही इन अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।