दैनिक भास्कर हिंदी: मुंबई में अंबानी-अडानी के कार्यालय पर किसानों ने निकाला मोर्चा, अगली बैठक में शाह की मौजूदगी चाहते हैं किसान

December 23rd, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर डटे किसानों के समर्थन में मंगलवार को मुंबई में आंदोलन की गूंज सुनाई दी। मंगलवार को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के तहत स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, प्रहार संगठन, शेकाप, लोक संघर्ष मोर्चा समेत कई संगठनों ने मिलकर बांद्रा स्थिति मुंबई उपनगर जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला। विभिन्न संगठनों के नेता किसानों का मोर्चा बांद्रा के डायमंड मार्केट स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर कॉर्पोरेट हाऊस पर ले जाना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने जियो के कार्यालय से एक किमी पहले रोक लिया। शेतकरी संगठन के अध्यक्ष तथा पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। शेट्टी ने कहा कि नाक दबाए बिना सरकार का मुंह नहीं खुलेगा। इसलिए हमने अंबानी-अदानी के कार्यालय के सामने मोर्चा निकाला है। शेट्टी ने कहा कि केंद्र सरकार जानबुझकर किसानों के आंदोलन को भड़काने का प्रयास कर रही है। यदि किसानों के आंदोलन को रोकने की कोशिश की गई तो उसके परिणाम ठीक नहीं होंगे। नागपुर से निकले लेकिन मुंबई इस आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रहार संगठन के प्रमुख तथा प्रदेश के स्कूली शिक्षा राज्य मंत्री बच्चू कडू नागपुर से मुंबई आने के लिए मंगलवार की सुबह का विमान टिकट बुक कराया था लेकिन पुलिस ने उन्हें नागपुर में सिंचाई विभाग के गेस्ट हाऊस में रोक लिया था। नागपुर में पुलिस ने बताया कि हमें कडू को हवाई अड्डे तक नहीं पहुंचने देने के आदेश मिले हैं। हालांकि बाद में कडू ने सरकार में वरिष्ठ स्तर पर बात की। जिसके बाद उन्हें मुंबई जाने के लिए अनुमति दी गई। लेकिन नागपुर से मुंबई के लिए सीधी विमान सेवा नहीं होने के कारण वे पुणे पहुंचे। जिसके बाद वे सड़क मार्ग से पुणे से मुंबई की ओर रवाना हुए लेकिन तब तक यह आंदोलन खत्म हो चुका था। शेट्टी ने नागपुर में कडू को रोकने पर नाराजगी उन्होंने कहा कि पुलिस को कडू को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। 

कृषि कानून के समर्थन में कृषि मंत्री से मिले किसान नेता

उधर नई दिल्ली में भी किसान मुद्दों को लेकर सियासत गर्म है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर किसान संगठनों का आंदोलन लगातार जारी है तो वहीं कुछ किसान संगठन इस कानून के समर्थन में सरकार की पीठ ठोंक रहे हैं। मंगलवार को इंडियन किसान यूनियन और किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भेंट की और कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए ये कानून पूरी तरह किसानों के हित में हैं। इंडियन किसान यूनियन के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड के पूर्व मंत्री चौ रामकुमार वालिया और किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजय पाल प्रधान ने कृषि मंत्री से कहा कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र में दूरगामी सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। लिहाजा सरकार इन कानूनों को किसी भी स्थिति में वापस न ले। किसान नेताओं की इस दलील से खुश तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों से युवा पीढ़ी खेती की ओर आकर्षित होगी और खेती में लाभ एवं रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। उन्होने कहा कि कांग्रेस ने भी अपने घोषणापत्र में कृषि क्षेत्र में सुधार करने व निवेश लाने की बात कही थी, लेकिन अपनी राजनीतिक मजबूरियों के चलते वह इस दिशा में कदम नहीं उठा पाई।

सीएआईटी ने किसान आंदोलन को जल्द सुलझाने की सरकार से अपील

एक तरफ जहां खेती खिसानी को कृषि बिलों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए पिछले 27 दिनों से किसान सड़कों पर आंदोलनरत है वहीं दूसरी तरफ कन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने यहां एक बयान में कहा है कि आंदोलन की वजह से देश के व्यापार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। सीएआईटी ने कहा है कि इस प्रदर्शन से अब तक 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सीएआईटी ने कहा है कि राजधानी में चल रहे किसान आंदोलन से व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन ने सरकार के साथ सुप्रीम कोर्ट की वैकेशन बेंच को इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने की अपील की है। बयान में कहा है कि आंदोलन की वजह से देश के करीब 20 फीसदी ट्रक दूसरे राज्यों से सामन नहीं ला पा रहे है, जिसका व्यापारियों पर बुरा असर पड रहा है। इसलिए इस आंदोलन को जल्द से जल्द सुलझाया जाए

अगली बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी चाहते हैं किसान

नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान संगठन चाहते हैं कि सरकार और किसानों के बीच आगे होने वाली बैठक में सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह शामिल हों। इनका कहना है कि अमित शाह ही ठोस फैसला ले सकते हैं। पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रूलदू सिंह मांडा ने कहा कि हम अगली बैठक में अमित शाह की मौजूदगी चाहते हैं। रूलदू सिंह, जो सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक हुई सभी वार्ताओं में शामिल रहे हैं, ने कहा कि कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ हमारी कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन इन बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला है। उन्होने कृषि मंत्री के साथ बैठक से नाउम्मीदी जताते हुए कहा कि अमित शाह प्रभावी मंत्री हैं। लिहाजा हम चाहते हैं कि हमारे साथ अगली बैठक में गृह मंत्री शाह रहें ताकि ठोस निर्णय हो सके। यह अलग बात है कि अमित शाह के साथ भी किसान नेता एक बार बैठक कर चुके हैं। रूलदू सिंह ने साफ किया कि धरनारत किसान कृषि कानून वापस लेने की अपनी मांग पर कायम हैं। बता दें कि सरकार ने अगली बैठक के लिए किसान नेताओं से समय तय करने का आग्रह किया है। इस संदर्भ में पंजाब के किसान नेताओं ने आज बैठक की। कल फिर किसान संगठनों की संयुक्त बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

किसानों की मांग को बंद कान व बंद दिमाग से सुन रही है सरकार : एआईकेएससीसी

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने आरोप लगाया है कि कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर लोगों की आंख में धूल झोंक रहे हैं। सरकार कृषि कानून वापसी की किसानों की मांग को बंद कान व बंद दिमाग से सुन रही है। एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने यहां कहा कि कृषि मंत्री का पत्र दिखाता है कि सरकार किसानों की 3 नए खेती के कानून रद्द करने की मांग को हल नहीं करना चाहती। समिति ने कहा कि सरकार किसानों को ठंड में पीड़ित होने देने के मकसद से उनकी मांग नहीं मान रही है और जानबूझकर कानून रद्द करने की मांग टाल रही है। उसने कहा कि विश्व भर में कारपोरेट छोटे मालिक किसानों की खेती की जमीनें छीन रहे हैं और जल स्त्रोतों पर कब्जा कर रहे हैं ताकि वे इससे ऊर्जा क्षेत्र, रियल स्टेट और दूसरे व्यवसायों को बढ़ावा दे सकें। इसकी वजह से किसान विदेशी कंपनियों और उनकी सेवा करने वाली सरकारों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। एआईकेएससीसी ने भाजपा शासित हरियाणा और उत्तरप्रदेश में गिरफ्तारी व दमन की नीति की निंदा की है। मुंबई में अंबानी व अडाणी के विरूद्ध एआईकेएससीसी के प्रदर्शन को जबर्दस्त बताते हुए कहा कि कल पूरे देश में दोपहर के भोजन का उपवास रहेगा।
 
 

 

 

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