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किसान कर्ज लेने नहीं आ रहे आगे - पालकमंत्री बावनकुले

किसान कर्ज लेने नहीं आ रहे आगे - पालकमंत्री बावनकुले

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शासन-प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद जिले में केवल 30 फीसदी फसल कर्ज वितरण पर पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट किया कि, बैंक फसल कर्ज देने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसान ही कर्ज लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। विभागीय आयुक्तालय के सभा कक्ष में पत्रकारों से चर्चा के दौरान पालकमंत्री बावनकुले ने कहा कि, किसान कर्ज लेने के लिए आगे नहीं आ रहे। किसानों का कर्ज मांगने का फ्लो कम है। मैं खुद 3 दिन शिविर में था और प्रशासन की तरफ से किसानों को कर्ज लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। किसान आगे नहीं आने से फसल कर्ज का वितरण ज्यादा नहीं हो सका। जिले में जगह-जगह किसान सम्मेलन हो रहे हैं। 

बैंकों को किसान का सिबिल नहीं देखना चाहिए 

जिले में फसल कर्ज का वितरण उम्मीद से कम होने के मुद्दे पर कृषि मंत्री डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि, कई राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्ज बांटने के आंकडे समाधानकारक नहीं है। फसल कर्ज बांटते समय कई राष्ट्रीयकृत बैंकोें द्वारा किसानों का सिबिल देखने की शिकायतें मिली हैं। ऐसा करने वाली बैंकों पर सख्त एक्शन होगा। कर्ज वितरण का आंकडा बढ़ाने के निर्देश बैंकों को दिए गए हैं। 

सात-बारा से नहीं हटा कर्ज का बोझ 

शेतकरी संगठन के प्रवक्ता राम नेवले ने कहा कि, राज्य सरकार ने दो साल पहले कर्जमाफी की घोषणा तो कर दी, लेकिन कर्जमाफी की राशि बैंकों तक नहीं पहुंचने से 50 फीसदी से ज्यादा किसानों के सात-बारा कोरे नहीं हो सके। अभी भी सात-बारा पर बोझ दिख रहा है और इस कारण राष्ट्रीयकृत बैंक किसानों को फसल कर्ज नहीं दे रही। उन्होंने आरोप लगाया कि, कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा हुआ और कर्ज के लिए किसान आगे नहीं आने की बात पूरी तरह गलत है। बैंक कर्ज नहीं देने से किसान मजबूरी में साहूकार के पास पहुंच रहे हैं। 

जनता की समस्या का तुरंत निपटारा करें 

पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिले की  जनता की समस्या का तुरंत निपटारा कर तत्संबंधी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।  रविभवन सभागृह में हुई समीक्षा बैठक में महापौर नंदा जिचकार व विविध विभाग के वरिष्ठ  अधिकारी उपस्थित थे।  बैठक में 18 विषयांे पर चर्चा हुई। आरटीई के तहत  विद्यार्थियों का स्कूल में प्रवेश, स्कूल द्वारा बढ़ाया गया शुल्क, कामठी कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सब्जी विक्रेताओं की समस्या, कोच्छी गांव का पुनर्वसन व मदद, सावनेर तहसील के प्रभावित किसानों की मदद, गोसीखुर्द प्रकल्प के सालेभट्टी-सालेशहरी की प्रियवंदा माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय का निर्माणकार्य व विविध सुविधा, काटोल-नरखेड़ जलयुक्त शिवार काम का मेहनताना संबंधी शिकायतें मिलीं। बावनकुले ने शिकायतों का निपटारा शीघ्र करने को कहा है। 
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।