दैनिक भास्कर हिंदी: 6 फरवरी से मराठा आरक्षण पर शुरू होगी अंतिम सुनवाई, तब तक नियुक्ति पर रोक 

January 23rd, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि वह 6 फरवरी से मराठा समुदाय को शिक्षा व नौकरी में दिए गए 16 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगा। तब तक सरकार इस आरक्षण के तहत किसी भी विभाग में कोई नियुक्ति न करे। न्यायमूर्ति रणजीत मोरे व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने कहा कि हम 28 जनवरी को यह तय करेंगे कि मराठा समुदाय के आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की पूरी प्रति याचिकाकर्ताओं को प्रदान की जाए अथवा रिपोर्ट का अांशिक रुप उन्हें उपलब्ध कराए जाए।

आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बढ़ेगा तनावः कुंभकोणी

इससे पहले राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी व राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीए थोरात ने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को पिछड़ा वर्ग आयोग कि रिपोर्ट की प्रति देने पर इसके विपरीत परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम आयोग की चार हजार पन्ने की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को तैयार हैं। लेकिन इसमें से करीब 20 पन्ने जो मराठा समुदाय के इतिहास से जुड़े हैं, उसे हम सार्वजनिक नहीं करना चाहते। क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव बढ सकता है और कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

इस पर खंडपीठ ने कहा  कि सरकार पहले कोर्ट में रिपोर्ट पेश करे। उसका अध्ययन करने के बाद हम 28 जनवरी को तय करेंगे की आयोग कि रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी अथवा नहीं । इसके बाद हम 6 फरवरी से याचिका पर विस्तार से सुनवाई की शुरुआत करेंगे। तब तक सरकार अपने उस आश्वासन को कायम रखे जिसके तहत उसने मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण के तहत कोई नियुक्ति न करने की बात कही है।

इस पर सरकार की ओर से पैरवी कर रहे श्री थोरात ने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों में काफी पद रिक्त हैं। इसलिए नियुक्ति न करने के आश्वासन पर कायम रह पाना मुश्किल है। इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में हमें नियुक्ति पर रोक के लिए मजबूरन आदेश जारी करना पड़ेगा। इसके बाद सरकारी वकील ने नियुक्ति न करने के आश्वासन पर 6 फरवरी तक कायम रहने की बात कही।