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फ्लाइंग क्लब : प्रशिक्षुओं पर लाखों की फीस का बोझ

फ्लाइंग क्लब : प्रशिक्षुओं पर लाखों की फीस का बोझ

डिजिटल डेस्क, नागपुर। फ्लाइंग क्लब बंद होने से एक तो यहां प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षुओं को बीच से ही छोड़कर जाना पड़ा, तो दूसरी ओर ढाई साल से किसी को प्रशिक्षण का मौका नहीं मिला। वहीं बताया जा रहा है कि करीब 6 माह के बाद ही उसके आरंभ होने की संभावना है। इस चक्कर में प्रशिक्षुओं को लाखों रुपए का बोझ बढ़ गया है, क्योंकि नागपुर में लाखों रुपए में जो प्रशिक्षण पूरा हो जाता है उसके लिए निजी फ्लाइंग क्लब में एक करोड़ और उससे भी अधिक फीस चुकानी पड़ रही है। शुक्रवार को स्पष्ट कर िदया गया कि नागपुर फ्लाइंग क्लब की उड़ान आसान नहीं है, वहां के 4 विमानों को सुधारने में करीब 5 माह का समय लगने वाला है। इसके अलावा मुख्य उड़ान निदेशक (चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर) की नियुक्त जरूरी है, जिसे प्रमुख खामी बताया गया है। हालांकि प्रशासन ने सीएफआई की नियुक्त बाद में करने की बात कही है। यदि प्रशासन के अनुसार तय समय पर फ्लाइंग क्लब आरंभ हुआ, तो भी उसे बंद हुए 3 साल बीत चुके होंगे। हैरानी की बात यह है कि फ्लाइंग क्लब का मामला इतना महत्वपूर्ण होने के बाद भी उसका आरंभ करने की दिशा का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। नागपुर फ्लाइंग क्लब से 17 जून 2017 को आखिरी उड़ान भरी गई थी, इसके बाद अगस्त के करीब तत्कालीन मुख्य उड़ान निदेशक शिव जायस्वाल यहां से चले गए। इसके बाद इस पद पर अधिकृत मुख्य उड़ान निदेशक की नियुक्ति भी नहीं हो सकी।

कहीं साजिश तो नहीं

नागपुर फ्लाइंग क्लब पहले में भी बंद हो चुका है। इसके बाद एक बार फिर बंद हुआ, करीब ढाई साल बीत चुका है। इसको लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है। इन सबके बाद भी वह आरंभ होता नहीं दिखाई पड़ रहा है जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि कहीं किसी साजिश के तहत फ्लाइंग क्लब बंद नहीं हुआ? यह सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं कि नागपुर में प्रशिक्षण के लिए 15 लाख रुपए फीस देनी पड़ती है, जबकि गोंदिया या अन्य निजी फ्लाइंग क्लब में यह फीस कई गुना अधिक है।

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