दैनिक भास्कर हिंदी: पर्स में रखने सुविधाजनक हो, इसलिए बदले गए नोट के आकार -  हाईकोर्ट में आरबीआई की दलील 

September 5th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने बांबे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि नोट पर्स में रखने में सुविधाजनक हो, इस लिए उसके आकार में  बदलाव किया गया है। साथ ही नोटों का आकार छोटा होने से उसकी छपाई के खर्च में भी कमी आएगी। आरबीआई के उप महाप्रबंधक ने हलफनामा दायर कर हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरबीआई से पूछा था कि वह अक्सर नोटो व सिक्को के आकार-प्रकार में बदलाव क्यों किया जाता है? इस सवाल के जवाब में गुरुवार को आरबीआई की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है। हलफनामे में साफ किया गया है कि आरबीआई नेत्रहीनों को नोट व सिक्कों के पहचानने में आनेवाली दिक्कतों को लेकर संवेदनशील है। इसलिए आरबीआई नेत्रहीनों की इस समस्या के निदान के लिए एक एप विकसित कर रहा है। नवंबर तक इस एप को लांच कर दिया जाएगा। जिससे नेत्रहीनों की नोट व सिक्कों के पहचानने से जुड़ी समस्या का काफी हद कर समाधान हो जाएगा। आरबीआई ने कहा कि अब यदि फिर से नोटो का आकार पहले जैसा किया गया तो इससे काफी नुकसान होगा। हलफनामे में कहा गया है कि कुछ नोटों में एक खास चिन्ह बनाया गया है जिसके स्पर्श से नेत्रहीनों को नोटों को पहचानने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों की मदद से नोटों के आकार में बदलाव का निर्णय किया गया है। 

नेत्रहीनों को नोटों व सिक्कों की पहचान करने में आनेवाली दिक्कतों को लेकर ‘नेशनल एसोसिएशन फार ब्लाइंड’ ने अधिवक्ता उदय वारुंजकर के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। गुुरुवार को मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग की खंडपीठ के सामने इस याचिका पर सुनवाई हुई। इससे पहले आरबीआई की ओर से मामले को लेकर हलफनामा दायर किया गया।

देश के कई इलाकों में इंटरनेट सुविधा नहीं

हलफनामे पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि अभी भी हमारे देश में एक ऐसा राज्य है, जहां पर इंटरनेट सेवा पूरी तरह से ठप है। इसके अलावा देश के कई इलाकों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है। ऐसे में इंटरनेट के अभाव में नेत्रहीनों को कैसे राहत मिल सकती है? जहां तक बात नोटो के आकार के संबंध में दिए गए तर्क की है तो कई देशों में पहले से नोटों का आकार काफी छोटा है। डालर का आकार तो पहले से ही काफी कम है। खंडपीठ के सवाल के जवाब में आरबीआई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता वी धोंड ने कहा कि आरबीआई की ओर से जारी किए जानेवाले एप के लिए इंटरनेट की जरुरत नहीं होगी। इसे सिर्फ एक बार मोबाइल में इंस्टाल करना पड़ेगा। इसके बाद यह अपना काम करेगा। जिससे नेत्रहीनों को राहत मिल सकेगी। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को रखी है। 
 

खबरें और भी हैं...