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ऊदबिलाव को पकड़ने में वन विभाग को नहीं मिली सफलता

ऊदबिलाव को पकड़ने में वन विभाग को नहीं मिली सफलता

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शिवाजीनगर-महादुला में वन विभाग की ओर से 2 पिंजरे रखने के बावजूद अभी तक ऊदबिलाव को पकड़ने में सफलता नहीं मिली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब ऊदबिलाव मोहल्ले के अन्य घरों में रात को घूम रहा है। रोज अपना ठिकाना बदलने से स्थानीय नागरिकों की चिंता और बढ़ गई है। शुक्रवार को रात में एक पिंजरा अजाबराव गाडगे एवं दूसरा पिंजरा दिगांबर बावनकुले के घर में वन विभाग ने रखा था, लेकिन सफलता नहीं मिली। 

शनिवार को नगरसेविका सारिका झोड ने पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की एवं घटना की जानकारी दी। चंद्रशेखर बावनकुले ने मुख्य अभियंता आरबी तासकर से फोर पर बात की एवं घटना की गंभीरता समझते हुए शिवाजीनगर से संलग्न बिजलीघर सीमा अंतर्गत झाड़ियां साफ करने को कहा है। ऊदबिलाव एवं उसके 2 बच्चे इधर-उधर घरों में घूमने से नागरिकों में भय व्याप्त है। सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट सीपीआरआई इमारत के प्रमुख राजीव रंजन ने फोन नहीं उठाया। उल्लेखनीय है कि, सीपीआरआई संस्था अब वर्धा रोड पर चली गई है। उनकी प्रयोगशाला इमारत वहां बन गई है। महानिर्मिती द्वारा लीज पर संस्था को जगह 15 से 20 वर्ष पूर्व दी गई थी, लेकिन अब संस्था का कार्य बढ़ जाने से वर्धा रोड पर सीपीआरआई ने अपनी भव्य इमारत खड़ी की है। कोराडी में केवल निवास क्वार्टर है। आधे से ज्यादा क्वार्टर खाली होने से बिल्डिंग खंडहर बन गई है। यहां केवल जानवर निवास करते हैं। 

सीपीआरआई ने अब यह जगह महानिर्मिती को सौंप देनी चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार सीपीआरआई अपनी लागत राशि वापस चाहती है, लेकिन महानिर्मिती फ्री ऑफ कास्ट चाहती है। इस विवाद में खंडहर इमारत में जानवरों का बसेरा हो गया है, जिसकी तकलीफ स्थानीय नागरिकों को हो रही है। यह कहां तक उचित है।

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