दैनिक भास्कर हिंदी: मुंबई में सैंकड़ों लोगों को फर्जी टीका लगाने वाले चार गिरफ्तार, मध्य प्रदेश से पकड़ाया वैक्सीन का सप्लायर

June 18th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महानगर के कांदिवली इलाके में स्थित हीरानंदानी हेरिटेज सोसायटी के रविवासियों को कोविड का फर्जी टीका लगाने के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा एक और संदिग्ध को सतना से हिरासत में लिया गया है। फर्जी टीकाकरण कैम्प के लिए यही व्यक्ति वैक्सीन सप्लाई करता था। छानबीन में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कई जगहों पर इसी तरह फर्जी वैक्सीन का कैंप लगवाया है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड 10वीं फेल है। 

मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम महेंद्र सिंह, संजय गुप्ता, चंदन सिंह और नितिन मोडे है। इसके अलावा करीम अकबर अली नाम के एक व्यक्ति को सतना में रेलवे पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह व्यक्ति वैक्सीन मुहैया कराता था। बिहार के मूल निवासी अली को सतना से मुंबई लाया जा रहा है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिलीप सावंत ने बताया कि जांच में पता चला है कि वैक्सीन लगावाने के लिए मुंबई महानगर पालिका से जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। यही नहीं टीका भी अधिकृत स्त्रोत से नहीं खरीदा गया था साथ ही टीकाकरण के दौरान वहां कोई डॉक्टर तक मौजूद नहीं था।

इस बात की छानबीन की जा रही है कि टीका असली था या नहीं। इस पूरे मामले का मास्टर माइंड महेंद्र सिंह है। उसके पास से पुलिस ने 9 लाख रुपए भी बरामद किए हैं। सावंत ने बताया कि इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड 10वीं फेल है फिर भी वह 17 साल से मेडिकल फील्ड में काम कर रहा है। मामले में संजय गुप्ता ने खुद को कोकिलाबेन धीरूबाई अंबानी अस्पताल का प्रतिनिधी बताकर सोसायटी के लोगों से संपर्क कर उन्हें टीकाकरण के लिए तैयार किया था, जबकि चंदन और नितिन ने कोविड ऐप से डाटा चोरी कर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर लोगों को दिया था, दोनों निजी अस्पतालों में काम करते हैं। मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 25 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। 

क्या है मामला

कांदिवली के हीरानंदानी हेरिटेज सोसायटी से संपर्क कर आरोपी ने खुद को एक निजी अस्पताल का प्रतिनिधी बताते हुए टीकाकरण का प्रस्ताव रखा। इसके बाद 30 मई को टीकाकरण हुआ और 390 लोगों ने प्रतिव्यक्ति 1250 रुपए देकर टीके की खुराक ली। लेकिन लोगों को संदेह होना तब शुरू हुआ जब टीके लगने के बाद आम तौर पर दिखने वाले थकान और बुखार जैसे लक्षण किसी में नजर नहीं आए। शक और पुख्ता हो गया, जब लोगों को टीकाकरण के बाद कोविन ऐप से कोई संदेश नहीं आया और बाद में उन्हें 15 दिन बाद जो प्रमाणपत्र मिला उसमें टीकाकरण मुंबई के अलग-अलग अस्पतालों में किसी और दिन लगने की जानकारी थी। टीके लगने से पहले ही कथित वैक्सीन की शीशियां खुली हुईं थीं और लोगों को टीकाकरण के दौरान तस्वीर भी नहीं लेने दी गई थी। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस से की गई। शुरुआती छानबीन के बाद पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। 

9 जगहों पर लगाए गए हैं टीके

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिलीप सावंत ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वे नौ जगहों पर इसी तरह कीटाकरण का कैंप लगा चुके हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि गुप्ता ने टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मैच बॉक्स पिक्चर्स के कर्मचारियों के लिए भी टीकाकरण अभियान चलाया था। लोगों से पैसे लेकर टीके तो लगा दिए गए लेकिन उन्हें सर्टिफेकेट नहीं मिला।   
 

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