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ऐसे एप से सावधान! PM के नाम पर लाखों को लगाया चूना, यूपी-राजस्थान में खोला था कॉल सेंटर 

ऐसे एप से सावधान! PM के नाम पर लाखों को लगाया चूना, यूपी-राजस्थान में खोला था कॉल सेंटर 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रधानमंत्री के नाम पर ऐप और वेबसाइट बनाकर कर्ज देने के नाम पर देशभर के पौने तीन लाख से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले चार आरोपियों को मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लोगों को चूना लगाने के लिए उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और राजस्थान के जयपुर में कॉल सेंटर खोल रखा था। प्रधानमंत्री के नाम पर कर्ज देने के लिए आरोपियों ने नौ मोबाइल ऐप और तीन वेबसाइट बना रखी थी। देशभर के लोगों से हो रही ठगी का भंडाफोड़ तब हुआ जब आरोपियों ने एक ऐप पर मुंबई के कुर्ला में रहने वाले एक व्यक्ति का मोबाइल नंबर डाल दिया। 

दरअसल कुर्ला में रहने वाले सूरज सावले नाम के 24 वर्षीय व्यक्ति को लगातार अनजान लोगों के फोन आ रहे थे। इनमें से कुछ कर्ज लेने की प्रक्रिया पूछ रहे थे जबकि ज्यादातर उन्हें प्रोसेसिंग फीस वापस करने के लिए धमकी दे रहे थे। शुरूआत में सावले को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है और लोग उन्हें क्यों धमका रहे हैं। परेशान होकर उन्होंने साइबर सेल में मामले की शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की तो उत्तर प्रदेश के अलीगढ और राजस्थान के जयपुर से चलाए जा रहे लोन रैकेट का पता चला।

मामले में संजीव सिंह, प्रांजुल राठौड़, रामनिवास कुमावत और विवेक शर्मा नाम के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अलीगढ़ से पकड़ा गया एक आरोपी राष्ट्रीय लोकदल का पदाधिकारी है। आरोपियों के पास से 18 मोबाइल, 10 हार्डडिस्क, 3 राउटर और 1 पेनड्राइव जब्त किया गया है।

इन ऐप से सावधान

पुलिस की छानबीन में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने पीएमवायएल, पीएम भारत लोन योजना, प्रधानमंत्री लोन योजना, प्रधानमंत्री योजना लोन, सर्वोत्तम फाइनांस, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, भारत योजना लोन, मुद्रा लोन और कृष्णा लोन नाम के ऐप के साथ प्रधानमंत्री लोन योजना, प्रधानमंत्री योजना लोन और सर्वोत्तम फाइनांस नाम से वेबसाइट भी बना रखी थी। ऐप डाउनलोड कर या वेबसाइट पर आकर रजिस्ट्रेशन कराने वालों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। डीसीपी रश्मी करंदीकर ने बताया कि अब तक कि जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के ऐप केंद्र सरकार का समझकर अब तक 2 लाख 79 हजार 352 लोग इन्हें डाउनलोड कर चुके हैं। अब तक जो खुलासा हुआ है उससे पता चला है कि प्रोसेसिंग फीस के नाम पर आरोपी लोगों से चार करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं। आशंका है कि ठगी की रकम और ज्यादा हो सकती है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।