comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कचरा गेहूँ का ढेर लगाया, सवा करोड़ का फर्जीवाड़ा

कचरा गेहूँ का ढेर लगाया, सवा करोड़ का फर्जीवाड़ा


डिजिटल डेस्क जबलपुर। गेहूँ खरीदी केंद्र बेलखेड़ा, उडऩा मेढ़ी में उपार्जन नीति की धज्जियाँ उड़ाते हुए ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों के नाम से फर्जी प्रविष्टियाँ करने व कचरा रेत, मिट्टी मिला हुआ गेहूँ बाहर से मँगवाकर ढेर लगवा दिया गया। खरीदी में जमकर की गयी धाँधली उजागर होने व  खरीदी केद्रों की जाँच में 5 सौ 86 मीट्रिक टन गेहूँ कम मिलने व करीब सवा करोड़ की धोखाधड़ी उजागर होने पर पाटन थाने में  समिति प्रबंधक, केंद्र प्रभारी व ऑपरेटर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वसुंधरा पेंड्रो ने थाने में एक लिखित शिकायत दी जिसमें बताया गया कि जिला विपणन अधिकारी विवेक तिवारी द्वारा खरीदी केंद्र बेलखेड़ा, उडऩा मेढ़ी क्रमांक 3 व 4 कोड का निरीक्षण किया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएँ पाई गयी थीं।  जाँच में पता चला कि समिति प्रबंधक, खरीदी प्रभारी एव ऑपरेटर द्वारा उपार्जन नीति एवं जिला स्तर से जारी निर्देशों के विपरीत गेहूँ का उपार्जन किया गया तथा ई-उपार्जन पोर्टल पर मात्रा 685 मीट्रिक टन गेहूँ कीमत 1 करोड़ 32 लाख 5 हजार रुपये की फर्जी प्रविष्टि कर धोखाधड़ी की गई। खरीदी केंद्र 3 में 148 मीट्रिक टन गेहूँ की कमी पाई गयी और उपार्जन पोर्टल पर 28 लाख 49 हजार किसानों के नाम पर फर्जी ई-प्रविष्टियाँ दर्ज की गयीं। इसी प्रकार केन्द्र क्रमांक 4 में खरीदी स्थल पर 538 मीट्रिक टन गेहूँ की कमी थी और पोर्टल पर 1 करोड़ 3 लाख 56 हजार किसानों के नाम पर फर्जी ई-प्रविष्टियाँ दर्ज की गयी थीं। शिकायत पर खरीदी केंद्र  के समिति प्रबंधक मुन्ना लाल बरखेड़ा, खरीदी प्रभारी रोहित शर्मा एवं ऑपरेटर अनुज दुबे के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 470, 34 के तहत मामला दर्ज कर जाँच में लिया गया है।
ढाई हजार क्विंटल गेहूँ अमानक-
शिकायत में बताया गया कि खरीदी केंद्रों की जाँच के दौरान पता चला कि इन केंद्रों से भंडारण के लिए 2 हजार 574 क्विंटल गेहूँ भेजा गया था, उसमें रेत, मिट्टी मिक्स थी। भंडारण के लिए भेजा गया गेहूँ अमानक क्वॉलिटी का था।
पुराने बारदानों से मँगाया गेहूँ-
 जाँच में पता चला कि ट्रक क्रमांक एमपी 20 जीए 7506 से पुराने बारदाने में मिट्टी एवं कुसी युक्त गेहूँ अन्यत्र स्थानों से भरकर लाया गया एवं उक्त बोरों से गेहूँ खाली कर खरीदी स्थल में ढेर लगाए गये थे।

कमेंट करें
KTnE5
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।