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महासचिव पडलकर ने छोड़ा आंबेडकर का साथ, तुपकर ने भी दिया इस्तीफा थाम सकते हैं कमल

महासचिव पडलकर ने छोड़ा आंबेडकर का साथ, तुपकर ने भी दिया इस्तीफा थाम सकते हैं कमल

डिजिटल डेस्क, मुंबई। वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के महासचिव गोपीचंद पडलकर ने इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पडलकर का इस्तीफा वीबीए के मुखिया प्रकाश आंबेडकर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब पडलकर के भाजपा में शामिल होने की संभावना है। पडलकर की धनगर समाज के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। गुरुवार को पडलकर ने कहा कि मैं किस दल में शामिल होऊंगा। इस बारे में घोषणा मैं अगले दो से तीन दिनों में करूंगा। अभी मेरी किसी पार्टी से चर्चा नहीं हुई है। पडलकर ने कहा कि मेरी वीबीए से कोई नाराजगी नहीं है। मैंने अपने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। वीबीए के मुखिया आंबेडकर मेरे लिए आदरणीय हैं लेकिन प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर मेरे कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुझे अलग फैसला करना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में हासिल किए थे 3 लाख वोट

पडलकर ने कहा कि मेरे समर्थकों की इच्छा है कि मैं विधानसभा चुनाव लड़ूं। लेकिन मैं किस विधानसभा सीट से चुनाव लडूंगा। इस पर मैंने फैसला नहीं किया है। इससे पहले पडलकर लोकसभा चुनाव से पहले वीबीए में शामिल हुए थे। लोकसभा चुनाव में वीबीए ने पडलकर को सांगली सीट से उतारा था। पडलकर को भाजपा के संजय काका पाटील से हार मिली थी लेकिन उन्होंने लोस चुनाव में 3 लाख वोट हासिल किए थे। लोकसभा चुनाव के ऐन पहले पार्टी में शामिल होने के कारण पडलकर को मिल रही अहमियत से वीबीए के संस्थापक सदस्य रहे लक्ष्मण माने ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद माने ने वीबीए से अलग होने का फैसला किया था। पडलकर वीबीए में प्रवेश करने से पहले भाजपा के करीबी माने जाते थे। लेकिन उन्होंने धनगर आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से अपनी राह अलग कर ली थी। पडलकर ने भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में धनगर आरक्षण के लिए कई आंदोलन भी किए थे। 

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