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गड़बड़ी रोकने ट्रांसप्लांटको लकर जागरुक करे सरकार – हाईकोर्ट

गड़बड़ी रोकने ट्रांसप्लांटको लकर जागरुक करे सरकार – हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अंग प्रत्यारोपण से जुड़े नियमों को लेकर आम नागरिकों को जागरुक करे। क्योंकि इन नियमों का उद्देश्य अंग प्रत्यारोपण के मामले में गड़बड़ी को रोकना है।  नियमों से जुड़ी जानकारी यदि संभव हो तो सरकार मराठी भाषा में एक अलग से अथवा संबंधित विभाग की वेबसाइट में उपलब्ध कराए। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अंग प्रत्यारोपण से जुड़े साल 2014 के नियमों को जान सके। न्यायमूर्ति अभय ओक व न्यायमूर्ति एमएस शंकलेचा की खंडपीठ ने सिध्दांत पाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया। याचिका में मुख्य रुप से ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्युमन आर्गन एक्ट के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। इससे पहले राज्य सरकार ने पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि जिन अस्पतालो में एक साल में 25 अंग प्रत्यारोपण के मामले होते है ऐसी अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण के मामलों को देखने के लिए अस्पताल आधारित कमेटी बनाई गई है। जिन अस्पतालों में 25 से कम अंग प्रत्यारोपण किए जाते है। वहां पर मरीजों को राज्य सरकार द्वारा गठिक की गई प्रधिकृत कमेटी से अनुमति लेनी पड़ती है। इसे देखते हुए खंडपीठ ने कहा कि जिन अस्पतालों में अस्पताल आधिरित कमेटी नहीं है सरकार वहां पर कमेटी गठित करे।

मराठी भाषा में दी जाए नियमों की जानकारी

जहां तक अंग प्रत्यारोपण को लेकर सरकार की प्रधिकृत कमेटी है सरकार उसके जरुरी स्टाफ उपलबब्ध कराए व रिक्त पदों को भरने के लिए समय-समय पर कदम उठाए। यहीं नहीं अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण के आकड़ों की जानकारी भी आनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। खंडपीठ ने मुंबई व पुणे की प्रधिकृत कमेटी के ज्यादा काम के मद्दे नजर सरकार को वहां की कमेटी के लिए एक स्थायी स्टाफ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार अंग प्रत्यारोपण से जुड़े नियमों व कमेटियों की एफएम रेडियों व अन्य संचार माध्यमों में व्यापक रुप से प्रचार प्रसार करे। क्योंकि अंग प्रत्यारोपण से जुड़े कानून का उद्देश्य अंग प्रत्यारोपण के मामले में गड़बड़ी न हो। 

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