दैनिक भास्कर हिंदी: नीरी को ढाई करोड़ देगी सरकार, ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर का होगा अध्ययन

February 21st, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। ध्वनि प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है, इस पहलू का अध्ययन करने के लिए नीरी (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) को  दो करोड़ 48 लाख 27 हजार रुपए की निधी मंजूर की गई है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) की ओर से पैरवी कर रही अधिवक्ता साधना महाशब्दे ने हलफनामा दायर कर बांबे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है। हलफनामे में साफ किया गया है कि नीरी ने इससे पहले राज्य के 27 महानगरपालिका क्षेत्रों की नाइज मैपिंग की थी। इस दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर जागरुकता पैदा करने के लिए नागपुर, औरंगाबाद, पुणे व मुंबई परिमंडल में संगोष्टी का आयोजन भी किया गया था। नाइज मैपिंग के बाद भी नीरी ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह अभी भी ध्वनि प्रदूषण को लेकर कुछ अन्य पहलूओं पर अध्ययन करना चाहती है। जिसके तहत ट्रैफिक, गति, हार्न, सड़क निर्माण व रेलवे से होनेवाले शोर का वायुमंडल पर असर शामिल है। इसके अलावा शहरीय इलाकों में होने वाले ध्वनि प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। किस तरह का ध्वनि प्रदूषण सबसे ज्यादा है। इन विषयों पर अध्ययन के लिए नीरी ने दो करोड 48 लाख रुपए की मांग की थी। जिसे एमपीसीबी ने सात फरवरी को मंजूरी दे दी है और इसके लिए बाकायदा वर्क आर्डर भी जारी कर दिया है। नीरी ध्वनि प्रदूषण के असर के अलावा इसके नियंत्रण को लेकर भी सुझाव देगी। ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता महेश बेडेकर सहित अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति अभय ओक की खंडपीठ ने हलफनामे पर गौर करने के बाद कहा कि हम अगली सुनवाई के दौरान इस मामले की विस्तार से सुनवाई करेगे।

एमडीसी होम की सुरक्षा-सुविधाओं की जानकारी दे सरकार: हाईकोर्ट
  
बांबे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मानसिक रुप से कमजोर बच्चों के लिए बनाए अनुदानित सुधार गृहों (एमडीसी होम) में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जानकारी मांगी है। हाईकोर्ट ने सरकार को एमडीसी होम की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों का भी ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने पेशे से वकील संगीता पुणेकर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। याचिका में मुख्य रुप से एमडीसी होम की सुरक्षा व बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे को उठाया गया है। इसके साथ ही मुंबई के मानखुर्द इलाके में एमडीसी होम में स्पीच थेरिपिस्ट की नियुक्ति का आग्रह किया गया है। इससे पहले सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर साफ किया कि मानखुर्द के एमडीसी होम में स्पीच थेरिपिस्ट की जरुरत नहीं है। न्यायमूर्ति अभय ओक की खंडपीठ ने हलफनामे में गौर करने के बाद कहा कि एमडीसी होम में मानसिक रुप से कमजोर बच्चों को स्पीच थेरिपिस्ट की जरुरत महसूस हो रही है। आखिर सरकार ने किस आधार पर यह निर्णय लिया है ? इसका अगली सुनवाई के दौरान खुलासा करे। खंडपीठ ने कहा है कि स्पीच थेरिपिस्ट के पद के सृजन में काफी समय लगेगा। तब तक सरकार वहां पर अंशकालिक स्पीच थेरिपिस्ट भेजे। खंडपीठ ने एमडीसी होम की सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी तस्वीर के साथ दे। खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान हमे राज्य भर के अनुदानित एमडीसी होम में उपलब्ध बुनियादि सुविधाओं की जानकारी हलफनामे में दी जाए। खंडपीठ ने फिलहाल मामले की सुनवाई आठ मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। 
 

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