comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

अवैध कब्जा खाली कराए जाने पर अनशन पर बैठा बर्खास्त हवलदार

अवैध कब्जा खाली कराए जाने पर अनशन पर बैठा बर्खास्त हवलदार

डिजिटल डेस्क जबलपुर। पुलिस लाइन में विगत 15 वर्षों से अवैध कब्जा कर परिवार सहित निवास कर रहा बर्खास्त हवलदार किशन लाल को वहाँ से हटाकर मकान तोड़े जाने की कार्रवाई के बाद वह अपने परिवार के साथ  माल गोदाम चौक पर अनशन पर बैठ गया है। उसका कहना था कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा वह अनशन जारी रखेगा। जानकारों के अनुसार इस अवैध कब्जे को खाली कराए जाने का आदेश एसपी अमित सिंह द्वारा दिया गया था। उसके बाद उक्त मकान को तोड़कर बर्खास्त हवलदार को लाइन से बाहर कर दिया गया।   सूत्रों के अनुसार वर्ष 2005 के पहले पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ किशन लाल का जीआरपी में तबादला किया गया था और उसके बाद ऐसी स्थिति निर्मित हुई कि उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्त किए जाने के बाद भी वह पुलिस लाइन की जमीन पर मकान बनाकर निवास कर रहा था। उसे वहाँ से हटाए जाने के लिए कई बार विभागीय नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर एसपी अमित सिंह के निर्देश पर कार्रवाई के निर्देश दिए गये थे। जिसके बाद पूर्व हवलदार की गृहस्थी का सामान निकालकर मकान को तोड़ा गया और पूरे परिवार को लाइन से बाहर किया गया। इस कार्रवाई से खफा होकर वह माल गोदाम चौक पर अनशन पर बैठ गया। 
जीआरपी में हुआ था तबादला 
 धरने पर बैठे बर्खास्त हवलदार किशन लाल और उसके परिजनो ंका कहना था कि उनका वर्ष 2005 में पुलिस कंट्रोल रूम से जीआरपी में तबादला हुआ था। वह वहाँ आमद देने पहुँचा था, लेकिन पद रिक्त न होने पर  तत्कालीन जीआरपी अधिकारियों ने  वापस लौैटा दिया था। उसके बाद वह वापस पुलिस लाइन आमद देने पहुँचा था तो आरआई ने उसे वापस लेने से मना कर दिया था। कुछ समय भटकने के बाद उसने न्यायालय की शरण ली थी। जिसके बाद उसे झूठे मामले में फँसा दिया गया था और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। 
कार्रवाई प्रभावित करने धमकी 
 विभागीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस लाइन में अवैध ढंग से कब्जा कर निवास कर रहे पूर्व हवलदार को लाइन से बाहर किए जाने को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन वह कब्जा छोडऩे तैयार नहीं था और पूर्व में भी इस तरह की कार्रवाई प्रस्तावित की जाने पर उसके द्वारा फाँसी लगाकर आत्महत्या करने की धमकी दी गयी थी, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
 

कमेंट करें
DoUun
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।