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अंबाझरी के वन क्षेत्र में लगी आग पर हाईकोर्ट ने वन विभाग से रोकथाम के बारे में पूछा

अंबाझरी के वन क्षेत्र में लगी आग पर हाईकोर्ट ने वन विभाग से रोकथाम के बारे में पूछा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अंबाझरी वन क्षेत्र में लगी आग का मुद्दा बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में उठा। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर सू-मोटो जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर मंगलवार को नागपुर खंडपीठ में सुनवाई हुई। जिसमें हाईकोर्ट ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस समाधान बताने के आदेश जारी किए हैं। क्षेत्रीय वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में करीब 750 हेक्टेयर परिसर है। 

वन क्षेत्र में बड़ा नुकसान

अंबझरी परिसर में कई प्रजाति के पक्षी, हिरण, निलगाय व अन्य प्राणी हैं। 26 मई को अचानक इस क्षेत्र में आग लग गई। आग को बढ़ता देख स्थानीय नागरिकों ने फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। फायर ब्रिगेड की गाडियां मौके पर तो पहुंची, लेकिन कई दिशा से बंद इस क्षेत्र में दाखिल होने के लिए गाड़ियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। जब तक गाड़ियां प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच पाई,काफी हिस्सा आग में जल कर खाक हो चुका था। इस क्षेत्र में राज्य सरकार की पौधारोपण योजना के तहत सैकड़ों पौधे लगाए गए थे। आग से बड़ वन क्षेत्र का नुकसान हुआ। इस मामले में समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने इस पर सू-मोटो जनहित याचिका दायर की। अब हाईकोर्ट ने ऐसे हादसे रोकने के लिए प्रशासन को समाधान बताने के आदेश जारी किए हैं।

कामठी नगर परिषद अध्यक्ष, सदस्यों को अपात्र करने के निवेदन पर निर्णय लें

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ से कामठी नगराध्यक्ष सहित 5 नगरसेवकों के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला दिया है। सुलेमान अब्बास चिराग अली हैदरी द्वारा दायर याचिका में नगराध्यक्ष व नगरसेवकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें अपात्र घोषित करने का मुद्दा उठाया था। हाईकोर्ट ने मामले में प्रतिवादी नगर रचना विभाग प्रधान सचिव, नागपुर जिलाधिकारी और नगर परिषद के मुख्य अधिकारी को इस पर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।  याचिकाकर्ता के अनुसार कामठी नगर परिषद अध्यक्ष मोहम्मद शहाजहां शफत अहमद, नगर सेवक मो.अकरम अब्दुल अजीज, मोहिसीनूर रहमान साफिया कैसर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके सात साल पूर्व रद्द हुए एक कांट्रैक्ट को पुन: जारी कर दिया। इससे सरकार को 5 लाख 55 हजार 334 रुपए का नुकसान हुआ। प्रतिवादियों ने नगर परिषद अधिनियम के सेक्शन 42 का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता ने 27 जून 2018 को इसकी शिकायत राज्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शहर विकास विभाग से की। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 4 दिसंबर को फिर एक बार निवेदन सौंपकर कार्रवाई करने की विनती की, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एड. अश्विन इंगोले ने पक्ष रखा।
 

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