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हाईकोर्ट की सलाह : बदल चुके हैं बाजार के मायने, मनपा बनाए राजस्व बढ़ाने वाली योजनाएं

हाईकोर्ट की सलाह : बदल चुके हैं बाजार के मायने, मनपा बनाए राजस्व बढ़ाने वाली योजनाएं

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भूमंडलीकरण, औद्योगिकीकरण व निजीकरण के दौर के बाद अर्थव्यवस्था में बदलाव सामने आ रहे हैं। अब बाजार की परिभाषी बदल गई है। पहले लोग एक खुली जगह पर अपने उत्पाद बेंच कर चले जाते थे। पर अब आसपास का परिसर बजार की स्थिति तय करता है। यदि बाजार के लिए आरक्षित जगह के पास कोई हाउसिंग कांप्लेक्स है तो आरक्षित जगह पर रेस्टोरेंट, बैंक कार्यालय, मैरिज हाल व कई दूसरे व्यावसायिक संस्थान खुलते हैं। इसलिए महानगरपालिका बाजार के लिए जमीन देते समय अपने राजस्व से जुड़े मुनाफे का भी ख्याल रखे। बाजार में जगह आवंटित करते समय ऐसी योजना बनाई जाए जिससे वहां खुलने वाले व्यावसायिक संस्थानों से उसे भी लाभ मिले। 

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप इंदुलकर की ओर से दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उपरोक्त बात कही। याचिका में दावा किया गया था कि ठाणे महानगरपालिका ने 1976 में घोडबंदर रोड इलाके में बाजार के लिए जगह आरक्षित की थी। आरक्षित जगह पर बनी इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर तो दुकाने खुली। लेकिन ऊपरी हिस्से में बैंक का कार्यालय, रेस्टोरेंट व मैरिज हाल शुरु कर दिए गए। जिससे कारोबारी मोेटा मनुाफा कमा रहे हैं। जबकि इससे मनपा को राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

इस पर खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान में बाजार से जुड़ी अवधारणा बदल चुकी है। अब बाजार की जमीन के इर्दगिर्द होनेवाला निर्माण कार्य बाजार का स्वरुप तय करते हैं। परंपरागत तौर पर लोग अब बाजार में अपना समान बेचकर नहीं लौटते है। अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। अब बैंको में लोगों की बेहद कम भीड़ नजर आती है। लोग बहुत कुछ आनलाइन कारोबार कर रहे हैं। इसलिए जरुरी है कि महानगरपालिका बाजार की जमीन को लेकर ऐसी योजनाए बनाएं जिससे उसे राजस्व का लाभ मिले। ठाणे मनपा की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राम आप्टे ने इस विषय पर योजना तैयार करने के लिए समय की मांग की। इसके बाद खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 20 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। 
 

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