दैनिक भास्कर हिंदी: विदेशी चंदा मामले में इंदिरा जयसिंह-ग्रोवर को हाईकोर्ट से मिली राहत

July 25th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने फारेन कांट्रिब्यूशन रेग्युलेशन कानून से जुड़े प्रावधानों के कथित उल्लंघन के आरोपों को लेकर सीबीआई की कार्रवाई का सामना कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर व इंदिरा जयसिंह को अंतरिम राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने मामले को लेकर सीबीआई को 19 अगस्त तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया और तब तक अधिवक्ता ग्रोवर व इंदिरा जय सिंह के खिलाफ किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।

 दोनों वकीलों ने ‘लायर कलेक्टिव’ नामक गैर सरकारी संस्था के प्रमुख हैं। संस्था को मिलनेवाले विदेशी चंदे से जुड़ी सहायता में कथित अनियमितता को लेकर सीबीआई ने पिछले दिनों अधिवक्ता ग्रोवर व इंदिरा जयसिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई ने दोनों अधिवक्ताओं के मुंबई व दिल्ली स्थित कार्यालयों पर छापेमारी भी की थी। यह कार्रवाई मुख्य रुप से साल 2016 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से फारेन कांट्रिब्यूशन रेग्युलेशन कानून के प्रावधानों के तहत दोनों वकीलों की संस्था ‘लायर कलेक्टिव’ के विदेशी चंदे के पंजीयन को रद्द किया गया था।

सीबीआई की ओर से शुरु की गई कार्रवाई के विरोध में दोनों वकीलों ने लायर कलेक्टिव संस्था के मार्फत हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। गुरुवार को न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई। इस दौरान सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे एडिशनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिकाकर्ताओं को किसी तरह की राहत देने का विरोध किया। इस मामले में हलफनामा दायर करने के लिए समय की मांग की। जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आस्पी चिनाय ने सीबीआई की कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जिस आधार पर कार्रवाई शुरु की है वह मामला अदालत में न्याय प्रविष्ट है। इसलिए सीबीआई की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने अधिवक्ता ग्रोवर व इंदिरा जयसिंह को राहत प्रदान की। अधिवक्ता ग्रोवर व इंदिरा जयसिंह पति-पत्नी हैं। दोनों मिलकर ‘लायर कलेक्टिव’ नामक गैर सरकारी संस्था चलाते हैं। यह संस्था मुख्य रुप से मानवाधिकार के हनन से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाती है।

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