दैनिक भास्कर हिंदी: कलेक्टर, एसडीओ, कमिश्नर सहित अमरकंटक नपं अध्यक्ष पर हाईकोर्ट ने लगाई पांच-पांच हजार रुपए की कॉस्ट

May 9th, 2019

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाईकोर्ट ने बार-बार अवसर दिए जाने के बाद जवाब पेश नहीं करने पर अमरकंटक नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभा पनारिया, अनूपपुर कलेक्टर, एसडीओ पुष्पराज नगर और शहडोल कमिश्नर पर पांच-पांच हजार रुपए की कॉस्ट लगाई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकल पीठ ने 8 जुलाई तक सभी को अनिवार्य रूप से जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। 

अनूपपुर निवासी मनमोहन पनिका की ओर से वर्ष 2017 में दायर याचिका में कहा गया कि अमरकंटक नगर पंचायत की अध्यक्ष प्रभा पनारिया मूल रूप से डिंडोरी जिले की निवासी है। उनकी जाति अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है। प्रभा पनारिया ने एसटी के लिए सुरक्षित नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट से चुनाव लडऩे के लिए एसटी का फर्जी प्रमाण-पत्र बनाया। फर्जी जाति प्रमाण के जरिए चुनाव लड़कर प्रभा पनारिया नगर पंचायत अध्यक्ष बन गई। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए याचिका दायर की गई।

अधिवक्ता केके पांडे और कौशलेश पांडे ने एकल पीठ को बताया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बाद नगर पंचायत अध्यक्ष और अन्य अनावेदक जवाब पेश नहीं कर रहे है। इसकी वजह से मामले की आगे सुनवाई नहीं हो पा रही है। एकल पीठ ने नगर पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य अनावेदकों पर पांच-पांच हजार रुपए की कॉस्ट लगाते हुए 8 जुलाई तक अनिवार्य रूप से जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

वाणिज्यिक कर कार्यालय के लिपिक को चार साल की सजा
लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश ने रिश्वत लेने के आरोप में वाणिज्यिक कर कार्यालय के लिपिक रमाशंकर तिवारी को 4 साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 20 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन के अनुसार शिवनगर वीर सावरकर वार्ड गढ़ा निवासी गोपाल कृष्ण तिवारी ने 28 अगस्त 2017 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई कि वह शिवनगर में शिव बारातघर का संचालन करता है। वाणिज्यिक कर विभाग ने 26 जुलाई 2017 को उसे बारातघर का सेवाकर जमा करने के लिए नोटिस दिया है। नोटिस लेकर वह वाणिज्यिक कर कार्यालय गया तो उसे लिपिक रमाशंकर तिवारी ने कहा कि उसे 20 हजार रुपए दो तो वह सेवा कर से छूट दिला देगा। मोलभाव के बाद सौदा 15 हजार रुपए में तय हुआ। लोकायुक्त की टीम ने 31 अगस्त 2017 को वाणिज्यिक कर कार्यालय में लिपिक रमाशंकर तिवारी को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने लिपिक को चार साल का कारावास और 20 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। 
 

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