दैनिक भास्कर हिंदी: हाईकोर्ट ने कहा: सिर्फ हाकिंग जोन में ही धंधा कर सकते हैं फेरीवाले

November 1st, 2017

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि फेरीवाले कही पर भी अपनी दुकान नहीं लगा सकते। उन्हें सिर्फ हाकिंग जोन (फेरीवाला क्षेत्र) में ही समान बेचने की इजाजत है। इसके साथ ही फेरीवाले शैक्षणिक संस्थान,पुल, अस्पताल व धार्मिक स्थलों के सौ मीटर के दायरे में समान नहीं बेच सकते है। हाकिंग जोन तय होने तक फेरीवालों को कही पर भी धंधा करने की अनुमति दी जाए इस तरह की मांग को लेकर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम सहित कई फेरीवाला संगठनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। किंतु हाईकोर्ट ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया है। याचिका में मुख्य रुप से राज्यभर में फेरीवालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही कहा गया था कि फेरीवालों के लिए जल्द से जल्द नियम बनाए जाए और स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी का गठन किया जाए। ताकि यह तय किया जा सके कि अधिकृत फेरीवाले कौन हैं? जब तक यह तय नहीं होता तब तक फेरीवालों को कही पर भी समान बेचने की इजाजत दी जाए। किंतु हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

तीन महीनों में पूरा हो सर्वे

जस्टिस भूषण गवई व जस्टिस एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए राज्य की सभी महानगरपालिकाओं व नगर परिषदों को 6 सप्ताह के भीतर टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। इसके बाद तीन महीनो में फेरीवालों के सर्वेक्षण का काम पूरा करने को कहा है। यह सब काम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2009 में फेरीवालों के लिए तय किए गए दिशा-निर्देशों के तहत किया जाए। इसके साथ ही स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी में फेरीवालों के प्रतिनिधियों को चुनाव के जरिए शामिल किया जाए। ताकि कमेटी में फेरीवालों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सके। खंडपीठ ने साफ किया कि महानगरपालिकाएं अपने इलाके में फेरीवाला व गैरफेरीवाला क्षेत्र निर्धारित करें। सिर्फ फेरीवाला क्षेत्र में ही फेरीवालों को अपना समान बचने की इजाजत दी जाए। गैर फेरीवाला क्षेत्र में समान बेचने की अनुमति न दी जाए। सभी स्थानीय निकाय अपने यहां के पंजीकृत फेरीवालों की सूची भी सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रकाशित करें।

स्कूल-कालेज, मंर-मस्जिद के पास नहीं लगा सकते दुकानें 

खंडपीठ ने कहा कि शैक्षणिक संसाधन, धार्मिक स्थल व अस्पताल के सौ मीटर के दायरे में फेरीवाले समान नहीं बेच सकते है। रेलवे पादचारी पुल पर किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है, इस लिए यहां पर किसी प्रकार का समान नहीं बेचा जा सकता। रेलवे स्टेशन व स्थानीय निकाय के बजार के 150 मीटर के दायरे में फेरीवाले दुकाने नहीं लगा सकते। धार्मिक स्थल के सौ मीटर के दायर में सिर्फ पूजा सामाग्री ही बेची जा सकती है। नारियल, फुल व दूसरी पूजा समाग्री ही बेच सकते है। इस दौरान खंडपीठ ने साल 2015 में जस्टिस अभय ओक की ओर से फेरीवालो के संबंध में दिए गए फैसले को कायम रखा। इस फैसले में कहा गया था कि 1 मई 2014 से पहले पंजीकृत फेरीवालों को ही अधिकृत फेरीवाला माना जाए।