दैनिक भास्कर हिंदी: हाईकोर्ट : होम क्वारेंटाइन का आदेश मौलिक अधिकारों का उलंघन नहीं, रेप मामले में थल सेना के मेजर को अग्रिम जमानत  

August 22nd, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि 10 दिनों तक तक होम क्वारेंटीन रहने का आदेश नागरिकों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। हर नागरिक को सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। राज्य में जिस तरह कोरोना के मामले बढे हैं उसके मद्देनजर क्वारेंटाइन कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कारगार कदम है। न्यायमूर्ति के के तातेड़ की खंडपीठ ने कहा कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना समय की जरुरत है। विशेष रुप से ऐसी जगहों पर जहां एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने वाले लोगों की संख्या अधिक है। खंडपीठ ने कहा कि हम राज्य सरकार की ओर से कोकण को लेकर सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों की सराहना करते हैं। होम क्वारनटाइन से संबंधित सरकार का निर्देश लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है। खंडपीठ ने यह बात कोकण में गणेशोत्सव के लिए अलग अलग जगह से कोकण जा रहे लोगों के संदर्भ में कहीं हैं। सरकार की ओर से पिछले दिनों निर्देश जारी किया गया था। जिसके खिलाफ जी.संतोष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियां नागरिकों के स्वतंत्र होकर देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने से रोकती है। जो नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन है। सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के तहत 12 अगस्त तक एसटी बस व निजी वाहन से कोकण जानेवालो के लिए 10 दिन तक होम क्वारेंटीन में रहने को कहा गया है। यह उचित नहीं है। इसके अलावा और भी कई पाबंदियां हैं। जो असवैधानिक हैं। याचिका पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। जो समय की जरुरत है। 

 

रेप के मामले में आरोपी थल सेना के मेजर को हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी भारतीय थल सेना के एक मेजर को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जुलाई 2020 में  एक महिला ने मेजर के खिलाफ मुंबई के डी एन नगर पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म , धोखाधड़ी व भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक वह एक एप के जरिए मेजर के संपर्क में आयी थी। इसके बाद मेजर ने मुंबई आकर उसके साथ विवाह की इच्छा जाहिर की थी और उसके साथ संबंध बनाए थे। इससे पहले निचली अदालत ने महिला को जमानत देने से इंकार कर दिया था। इसलिए मेजर ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया था। न्यायमूर्ति भारती डागरे के सामने मेजर के जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपी मेजर की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता ने इस आशंका के चलते मेरे मुवक्किल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि उसके और महिलाओं के साथ संबंध है। जबकि इस बारे में कोई सबूत सामने नहीं आया है। यह शिकायत भावना के आवेग में आकर दर्ज कराई गई है। न्यायमूर्ति ने मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद कहा कि यदि पीड़िता के आरोप सही होते तो दूसरी महिला भी शिकायत लेकर सामने आती । पर ऐसा नहीं हुआ है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायत भावना के आवेग में आकर दर्ज कराई गई हैं। यह कहते हुए न्यायमूर्ति ने आरोपी मेजर को 25 हजार रुपये के मुचलके पर अग्रिम जमानत प्रदान कर दी और उसे जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। 

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