दैनिक भास्कर हिंदी: नरसिंहपुर के अमर गुड्स को पांच साल से लगातार कैसे मिलता आ रहा परिवहन ठेका, सीबीआई करेगी पड़ताल - एफसीआई रिश्वत कांड 

June 17th, 2021

डिजिटल डेस्क जबलपुर । एफसीआई रिश्वत कांड की जांच के दौरान सुर्खियों में आए नरसिंहपुर के अमर गुड्स को पिछले पांच साल से लगातार मिलते आ रहे परिवहन ठेके जांच के दायरे में हैं। यदि प्राथमिक जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो 2016 के पहले के भी परिवहन ठेकों को जांच के दायरे में लाया जा सकता है। दरअसल गेहूं, धान, चना आदि की जबसे राज्य स्तर पर समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी शुरू हुई है, नरसिंहपुर जिले में परिवहन ठेका अमर गुड्स को ही मिलता आ रहा है।1990 से ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में काम करती आ रही अमर गुड्स लंबे समय से एफसीआई के लिए काम करती आई है। एफसीआई के बाद नान तथा मार्कफेड के परिवहन ठेके भी इसकी झोली में गए। बीच में दो-एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स ने परिवहन ठेकों में एंट्री लेने की कोशिश की लेकिन अमर गुड्स के संचालकों की अफसरों से मिलीभगत के चलते वे सफल नहीं हो सके। अफसर तो इस पर इतने मेहरबान रहे कि किसी दूसरे को ठेका मिलते देख, टेंडर ही निरस्त कर दिए और समय की कमी के नाम पर पुरानी दरों पर अमर गुड्स को काम दे दिया।
यूॅं है सीबीआई के रडार पर - रिश्वत कांड में सीबीआई की जांच का प्रमुख बिंदु एफसीआई से जुड़े ट्रांसपोर्टरों को ठेका की शर्तें व टेंडर प्रक्रिया हैे। जांच के दायरे में वे ठेका ट्रांसपोर्टर भी लिए गए हैं जो लंबे समय से लगातार ठेका पाते आ रहे हैं। संदेह है कि लगातार मिलने वाले इन ठेकों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। सूत्रों के अनुसार 8 जून को जब सीबीआई की टीम नरसिंहपुर आई थी तब उसने पिछले साढ़े चार साल के खाद्यान्न परिवहन ठेकों संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल की थी। कुछ दस्तावेज अपने साथ भी ले गई थी। एसपी सीबीआई (भोपाल) मनीष श्रोती के अनुसार, अभी परिवहन को लेकर की गई गड़बड़ी के संबंध में जांच चल रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
शहडोल-अनूपपुर में जकरिया पर अफसरों की कृपा से ट्रांसपोर्टर 
पा रहा दोहरा लाभ
शहडोल तथा अनूपपुर जिले में जकरिया ट्रांसपोर्ट द्वारा अनाधिकृत रूप से दोहरा लाभ प्राप्त करने का मामला सामने आया है। जून महीने की शुरुआत में शहडोल पहुंचे प्रधानमंत्री कल्याण योजना का 77 हजार मीट्रिक टन गेहूं शहडोल पहुंचता हैे। नान के एलआरटी ठेकेदार कटनी के श्रीराम ट्रांसपोर्ट को यह गेहूं रैक पाइंट से शहडोल के ब्यौहारी, जयसिंहनगर व गोहपारू तथा अनूपपुर के कोतमा, राजेंद्रग्राम व अनूपपुर के गोदामों तक पहुंचाना था। लेकिन श्रीराम के बजाय जकरिया ने रैक पाइंट से सीधे गेहूं उठाया और बजाय गोदामों के सीधे राशन दुकानों पर उतार दिया। ऐसा उसने इसलिए किया क्योंकि शहडोल में जकरिया के पास द्वार प्रदाय योजना का काम है और अनूपपुर के जतैहरी तथा पुष्पराजगढ़ में इसके साले की फौजी ट्रांसपोर्ट के पास। ऐसा कर उसने गोदाम से राशन दुकान तक लगने वाले भाड़े को बचा लिया। शहडोल में प्रत्यक्ष रूप से यह लाभ जकरिया ट्रांसपोर्ट ने तो अनूपपुर में बिना काम किए फौजी ट्रांसपोर्ट हासिल कर ले गई। दोहरा लाभ यह भी कि गोदाम शहरों से बाहर थे और राशन दुकानें शहर के अंदर, लिहाजा कम दूरी तय कर अधिक दूरी के गोदामों तक के भाड़े का लाभ भी जकरिया कमा ले गया। 
मंडला में भी हुई बालाजी की एंट्री
खाद्यान्न परिवहन में अनियमितताओं के लिए जबलपुर के साथ सिवनी में ख्यात बालाजी ने समीप के मंडला जिले में भी एंट्री कर ली है। सिवनी में पुन: एलआरटी का ठेका हासिल कर चुकी बालाजी ने वर्ष 2019-21 के लिए मंडला जिले में एलआरटी (लांग रूट ट्रांसपोर्ट) का ठेका हासिल किया है। सूत्रोंं के मुताबिक यहां भी इसके द्वारा खाद्यान्न परिवहन में अनियमितता की गई। कई बार के नोटिसों के बाद भी इसके द्वारा खाद्यान्न का उठाव तथा परिवहन नहीं किया गया। 
सिवनी में भी मिला नोटिस 
बालाजी को खाद्यान्न परिवहन में विलंब को लेकर सिवनी में भी नोटिस जारी हो चुका है। यहां रैक पाइंट से लेकर द्वारा प्रदाय तक में दखल रखने वाली बालाजी ट्रांसपोर्ट को हाल ही में 2 जून को खाद्यान्न के उठाव व भडारण में विलंब को लेकर नोटिस जारी किया गया है। परिवहन में विलंब को लेकर बालाजी के साथ यूनाइटेड कैरियर और सीताराम ट्रांसपोर्ट को भी तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं।

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