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रीवा में कोरोना पीडि़त समझ अस्पताल से बिना इलाज लौटाते रहे बिलासपुर में उसका टेस्ट निगेटिव आया

रीवा में कोरोना पीडि़त समझ अस्पताल से बिना इलाज लौटाते रहे बिलासपुर में उसका टेस्ट निगेटिव आया

फेफड़ों में संक्रमण की है परेशानी, रीवा में दो बार पहले भी निगेटिव आ चुकी थी रिपोर्ट
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
रीवा से आए फेफड़े में संक्रमण से पीडि़त मरीज को शहर के बड़े निजी अस्पतालों ने कोरोना पीडि़त समझ कर इलाज नहीं किया, बिलासपुर में उसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है। शहर के कई अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने के कारण पीडि़त को बिलासपुर जाना पड़ा था। इस मामले पर मरीज की पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर की गई थी। रीवा मेडिकल कॉलेज में हुए दो टेस्ट में भी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, वहाँ के डिस्चार्ज पेपर में इसका उल्लेख भी है। शहर  के मेट्रो हॉस्पिटल में फीवर क्लीनिक से ही उसे मेडिकल जाकर कोरोना की जाँच कराने कहा गया, वहीं लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल में उसे दो घंटे रखा गया, एक्स-रे में फेफड़ों के संक्रमण को देखते हुए मरीज को कोरोना पीडि़त मानकर उपचार देने की बजाय मेडिकल जाने कहा गया।
मेडिसिटी ने कहा- नहीं लिए पैसे
लाइफ मेडिसिटी अस्पताल के संचालक डॉ. मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि उक्त मरीज 11 जून की  रात में 2.30 बजे आए थे, उनकी हालत नाजुक थी। साँस की तकलीफ होनेे पर उन्हें हाई फ्लो ऑक्सीजन ट्रीटमेंट के साथ दवाएँ-इंजेक्शन दिए गए, साथ ही एक्स-रे कराया गया। मरीज को भर्ती करने के दौरान 10 हजार रुपए डिपॉजिट कराए गए थे। एक्स-रे रिपोर्ट के बाद उनके कोरोना संक्रमित होने की ज्यादा संभावनाएँ दिखीं, जिससे उन्हें मेडिकल रेफर कर दिया गया। मरीज से िसर्फ एक्स-रे का पैसा लिया गया, डिपॉजिट कराए गए 10 हजार रुपए उन्हें वापस कर दिए गए थे। उनका कहना था कि मरीज की हालत गंभीर थी, यदि वे उसे नॉर्मल कर नहीं भेजते तो वह बिलासपुर तक कैसे जा सकता था? दूसरी ओर मरीज की पत्नी पूजा पांडे का कहना था कि उन्हें 10 हजार रुपए बेड, 10 हजार ट्रीटमेंट, 1 हजार रुपए एक्स-रे तथा 4900 रुपए दवा का बिल दिया गया, बाद में कुछ राशि डिस्काउंट की गई।
दोनों अस्पतालों को दिया गया शोकॉज नोटिस
रीवा से आए मरीज को उपचार नहीं देने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुररिया ने लाइफ मेडिसिटी और मेट्रो अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिनों में जवाब देने कहा है। नोटिस में कहा गया है कि रीवा का यह मरीज 11 जून को इलाज कराने आया था, परिजनों द्वारा यह बताए जाने के बावजूद कि रीवा में कोविड टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है, उसका इलाज शुरू नहीं किया गया और पुन: कोविड टेस्ट कराकर आने की बात कही गई। इससे मरीज के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही। जबकि प्रोटोकाल के मुताबिक उन्हें इस मरीज का उपचार किया जाना था और इसकी सूचना जिला स्तरीय कोविड कंट्रोल रूम को दी जानी थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।