दैनिक भास्कर हिंदी: सरकारी कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बढ़ा खर्च, शिक्षा संस्थानों में रैगिंग रोकने कानून होगा सशक्त

June 18th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र सरकार शैक्षिक संस्थानों में छात्रों के उत्पीड़न को रोकने के लिए रैगिंग विरोधी कानून को और सशक्त बनायेगी। राज्य के गृहमंत्री रणजीत पाटिल ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। पाटिल ने कहा कि कानून होने के बावजूद जूनियर डॉक्टर पायल तड़वी की कथित आत्महत्या जैसी घटनाएं हो रही हैं। इस लिए हम रैंगिग विरोधी अधिनियम को सशक्त बनाने का प्रयास करेंगे। मंगलवार को भाजपा विधायक अतुल भातखलकर, कांग्रेस के अमित देशमुख, अमिल पटेल, नसीम खान, वर्षा गायकवाड सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत नायर अस्पताल की डाक्टर पायल तडवी के आत्महत्या का मामला उठाया था। उन्होंने मांग की कि तड़वी का उत्पीड़न करने वाले तीनों आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ तेजी से मुकदमा चलाया जाए और उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत कार्रवाई होनी चाहिये। इसके जवाब में गृह राज्यमंत्री पाटिल ने आश्वस्त किया कि मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों डा हेमा आहूजा, डा भक्ति मेहर और डा अंकिता खंडेलवाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। पाटिल ने कहा कि रैगिंग विरोधी कानून को और सशक्त करते हुए ऐसे कदम उठाए जाएंगे कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं हों। गौरतलब है कि तड़वी नायर अस्पताल में गाइनोकोलॉजी में दूसरे वर्ष की छात्रा थी और उसने छात्रावास के अपने कमरे में बीते 22 मई को आत्महत्या कर ली थी। तड़वी के परिजनों का आरोप है कि नायर अस्पताल में तीन वरिष्ठों ने उसके अनुसूचित जनजाति से होने की वजह से ताने कसे और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।  

सरकारी कर्मचारियों के वेतन-पेंशन पर बढ़ा खर्च 

वर्ष 2018-19 में सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर 88 हजार 630 करोड़ और पेंशन पर 27 हजार 567 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। जबकि 2019-20 में यह खर्च और बढ़ने वाला है। सातवे वेतन आयोग की सिफारिश पर अमल से वेतन खर्च 1 लाख 15 हजार 241 करोड़ तक पहुंचा गया है। जबकि सरकारी कर्मचारियों के पेंशन के लिए सरकार को 36 हजार 368 करोड़ रुपए का इंतजाम करना होगा। इस तरह का अनुमान बजट पुस्तिका में जताया गया है।  

बजट में किस विभाग को मिला क्या

विभाग                                       प्रस्तावित निधि
जलसंसाधन विभाग                     12 हजार 597 करोड़ रूपये
मृद व जलसंरक्षण                        3 हजार 182 करोड़ रूपये
पीडब्लूडी                                    16 हजार 25 करोड़ रूपये
नगरविकास                                35 हजार 791 करोड़ रूपये
मेडिकल शिक्षा व औषध                3 हजार 980 करोड़ रूपये
स्वास्थ्य                                    10 हजार 581 करोड़ रूपये
सामाजिक न्याय-विशेष सहायता    12 हजार 303 करोड़ रूपये
विमुक्त जाति भटक्या जमाती        2 हजार 881 करोड़ रूपये
आदिवासी विकास                       10 हजार 705 कोटी रूपये
विधि व न्याय                             2 हजार 745 कोटी रूपये
 

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