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 सांसद प्रज्ञा ठाकुर के निर्वाचन को चुनौती की याचिका खारिज करने के मामले पर फैसला सुरक्षित

 सांसद प्रज्ञा ठाकुर के निर्वाचन को चुनौती की याचिका खारिज करने के मामले पर फैसला सुरक्षित

याचिककर्ता के अधिवक्ता ने कहा, इलेक्ट्रानिक साक्ष्य के साथ पेश नहीं किया हलफनामा, चुनाव आयोग के आवेदन पर ईव्हीएम व व्हीव्हीपेट मशीन रिलीज करने के आदेश

जिटल डेस्क जबलपुर। भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के निर्वाचन को चुनौती देने वाले मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई दौरान अनावेदक सांसद प्रज्ञा ठाकुर की ओर से एक आवेदन पेश करते हुए कहा गया कि साक्ष्य अधिनियम के तहत हलफनामा पेश नहीं किया गया है लिहाजा, याचिका खारिज करने योग्य है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिये। इसके साथ ही एकलपीठ ने चुनाव आयोग के आवेदन पर भोपाल लोकसभा चुनाव में उपयोग की गयी ईव्हीएम तथा व्हीव्हीपेट मशीन को रिलीज करने के आदेश जारी कर दिए गए है।   
 भोपाल निवासी राकेश दीक्षित की ओर से दायर की गई चुनाव याचिका में भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। दायर मामले में आरोप है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने चुनाव के दौरान साम्प्रदायिक भाषण दिये। आरोप यह भी है कि उन्होने वोट पाने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। याचिका में लगाये गये आरोपों की पुष्टि के लिए साध्वी के भाषण की सीडी तथा अखबारों में प्रकाशित खबरों की कटिंग भी प्रस्तुत की गयी थी। याचिका में कहा गया की यह कृत्य जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 का उल्लंघन है। इसलिए उनके निर्वाचन को शूून्य घोषित किया जाये। याचिका की सुनवाई के दौरान सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की ओर से एक आवेदन पेश कर कहा गया कि साक्ष्य अधिनियम के तहत इलेक्ट्रानिक साक्ष्य रिकॉर्ड करने तथा कम्प्यूटर से उसकी सीडी बनाने वाले को हलफनामा पेश किया जाना आवश्यक है। याचिका के साथ निर्धारित प्रारूप में हलफनामा पेश नहीं किया गया है। लिहाजा, याचिका खारिज करने योग्य है। याचिका की सुनवाई दौरान चुनाव आयोग की ओर से भोपाल लोकसभा चुनाव में उपयोग की गयी ईव्हीएम तथा व्हीव्हीपेट मशीन को मुक्त जाने की मांग की गयी। एकलपीठ ने चुनाव आयोग की मांग स्वीकार कर ली है। याचिका की सुनवाई के दौरान अनावेदिका सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय तथा चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ हाजिर हुए।
 

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