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नागपुर में बीजेपी उम्मीदवार के काफिले पर हमला, पुणे में भिड़े एनसीपी-शिवसेना कार्यकर्ता, जानिए औरंगाबाद में क्या हुआ

नागपुर में बीजेपी उम्मीदवार के काफिले पर हमला, पुणे में भिड़े एनसीपी-शिवसेना कार्यकर्ता, जानिए औरंगाबाद में क्या हुआ

डिजिटल डेस्क, नागपुर। सावनेर कलमेश्वर विधानसभा चुनाव के दिन वलनी सर्कल के सिल्लेवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी तथा केदार समर्थक के बीच उपजे विवाद में केदार समर्थकों ने भाजपा प्रत्याशी की गाड़ी समेत दो और गाड़ी के शीशे फोड़ दिए। भाजपा प्रत्याशी पोतदार ने बताया कि, मैं सिल्लेवाड़ा स्थित पोलिंग बूथ पर मुआयने के लिए गया था। मेरे साथ मेरा पीए व सरकारी अंगरक्षक भी साथ में था। प्रीसाइडिंग ऑफिसर से बात करने के लिए बाहर आने पर एक महिला ने मेरे साथ विवाद करना शुरू कर दिया। मैं समीप के घर में गया। वहां भी कुछ लोगों ने मुझ पर हमला करने की कोशिश की। मेरी गाड़ी के अलावा मेरे साथ और भी दो गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। वहीं महिला ने बताया कि, भाजपा प्रत्याशी द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनके ही समर्थकों ने गाड़ी के शीशे तोड़े तथा प्रत्याशी ने मेरे साथ बदसलूकी की है। फिलहाल खापरखेड़ा पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। आगे की जांच जारी है।

पुणे में एनसीपी-शिवसेना कार्यकर्ता भिड़े

उधर पुणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान शिवसेना के तीन कार्यकर्ता घायल हो गए। सोमवार को पिंपरी में राकांपा के पूर्व उपमहापौर डब्बू आसवानी के कार्यालय के बाहर कुछ लोग संदिग्ध रूप से घूम रहे थे। कुछ ही समय में उन्होंने कार्यालय में घुसकर हमला बोल दिया, जिसमें वे मामूली रूप से घायल हो गए। इसके बाद राकांपा के कार्यकर्ता और शिवसेना कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए, जिसमें  तीन कार्यकर्ता घायल हुए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। काफी समय तक परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। इस संदर्भ में आसवानी ने कहा कि पिंपरी में मतदान कम हो, इसलिए शिवसेना ने आतंक फैलाने की कोशिश की। जबकि शिवसेना विधायक गौतम चाबुकस्वार ने कहा कि राकांपा को पराजय दिख रही है, इसलिए हमला बोला गया। उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की।  


दो गुटों में झड़प के बाद पुलिस ने भांजी लाठियां

औरंगाबाद में दो गुटों में झड़प के बाद पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी। शाहगंज पानी टंकी के सामने चेलीपूरा उर्दू स्कूल में मतदान के दौरान समाजवादी पार्टी और एमआईएम कार्यकर्ताओं के बीच विवादद के बाद दो गुट भिड़ गए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्की लाठियां भांजनी पड़ीं। उधर बोगस मतदान का आरोप लगाते हुए मंजूरपूरा उर्दू प्राथमिक स्कूल के पास एमआईएम और राकांपा कार्यकर्ता भिड़ गए। झड़प व मारपीट से उत्पन्न तनाव के कारण पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा। इसके अलावा शाम साढ़े पांच बजे कटकटगेट इलाके में भी दोनों गुटों ने एक-दूसरे की जमकर धुनाई की। 

जामखेड़ा में भाजपा कार्यकर्ताओं पर चाकू से हमला

वहीं अहमदनगर जिले के कर्जत-जामखेड़ मतदाता संघ के बांधखड़क में भाजपा और राकांपा कार्यकर्ताओं में चाकूबाजी हुई। बताया जा रहा है कि मतदान के लिए जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर राकांपा कार्यकर्ताओं ने  हमला किया। दो बुरी तरह जख्मी होने पर जामखेड़ के अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। जामखेड़ पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया है।

भाजपा कार्यकर्ता का सिर फोड़ दो भाइयों को पीटा

उधर जलगांव में मतदान का विरोध करते हुए भाजपा कार्यकर्ता शरद पाटील का सिर फोड़कर उसके दो भाइयों सुनील और संभाजी को सोमवार दोपहर बुरी ततरह पीटा गया। बताया गया कि उन्हें और उनके परिवार को गांव के ही कुछ लोगों व पंचायत समिति सदस्य छाया पाटील ने रविवार रात को जान से मारने की धमकी दी थी। फिर मतदान के लिए जाते समय हमला किया गया।

धुले-बीड में झड़प

धुले से कांग्रेस-राकांपा समर्थित उम्मीदवार पूर्व विधायक अनिल गोटे ने आरोप लगाया कि उन पर हमले की कोशिश की गई। बीड के बलपीर क्षेत्र में मतदाताओं को मतदान केन्द्रों तक ले जाने के लिए वाहनों के इस्तेमाल को लेकर शिवसेना उम्मीदवार जयदत्त क्षीरसागर और राकांपा उम्मीदवार संदीप क्षीरसागर के समर्थकों के बीच विवाद हुआ था। जबकि जालना के जामाखेड़ क्षेत्र में दो गुटो में संघर्ष हुआ। बाद में पुलिस ने मामला शांत कराया।  
जालना में पोलिंग एजेंट जख्मी

जालना जिले की अम्बड तहसील के जामखेड़ मतदान केंद्र पर राकांपा व भाजपा के कार्यकर्ता पोल एजेंट से पूछताछ करने भिड़ गए। हाथापाई में जामखेड़ के उपसरपंच सहित तीन लोगों को चोटें आईं। पोलिंग एजेंट भी जख्मी हुआ है।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।