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जानिए, कितने करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं 29 साल के आदित्य ठाकरे

जानिए, कितने करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं 29 साल के आदित्य ठाकरे

डिजिटल डेस्क, मुंबई। युवासेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे 16 करोड़ 5 लाख 12 हजार 172 रुपए की संपत्ति है। इसमें 11 करोड़ 38 लाख 5 हजार 258 रुपए चल और 4 करोड़ 67 लाख 6 हजार 914 रुपए की अचल संपत्ति है। गुरुवार को दाखिल किए गए आदित्य के नामांकन पत्र के हलफनामे के जरिए यह जानकारी सामने आई है। आदित्य ने चुनावी हलफनामे में अपना पेशा व्यवसायी बताया हैं। आदित्य के पास बीएमडब्लू कार है जिसका बाजार मूल्य 6 लाख 50 हजार रुपए है। आदित्य के पास 64 लाख 65 हजार 74 रुपए का सोना और मूल्यवान चीजें हैं। आदित्य का पांच अलग-अलग बैंकों में खाता है। इसमें उनके पास 5 करोड़ 79 लाख 48 हजार 339 रुपए का बैंक बैलेंस है जबकि 4 करोड़ 56 लाख 66 हजार 879 रुपए का फिक्स डिपोजिट है। आदित्य ने 13 विभिन्न कंपनियों के 18 लाख 14 हजार 986 रुपए के  शेयर खरीदे हैं। जबकि उनके पास 2 लाख रुपए के बांड और 20 लाख 39 हजार 12 रुपए के म्यूचुअल फंड है। आदित्य के पास केवल 13 हजार 344 रुपए की नकदी है। कल्याण के ठाकुर्ली में एक और ठाणे के घोड़बंदर रोड पर एक दुकान भी है। इसके अलावा रायगड के खालापुर तहसील में खेती की जमीन है। आदित्य के खिलाफ एक भी आपराधिक मामले दर्ज नहीं है। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय के के सी लॉ कालेज से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की है। 

आमदनी में गिरावट और उछाल

आदित्य के आयकर रिटर्न के अनुसार उनकी वार्षिक आमदनी घटती और बढ़ती रहती है। चुनावी हलफनामे के अनुसार आदित्य की आमदनी साल 2014-15 में 22 लाख 15 हजार 700 रुपए थी। जो साल 2015-16 में बढ़कर 85 लाख 50 हजार 70 रुपए हो गई। फिर साल 2016-17 में घटकर 9 लाख 35 हजार 110 रुपए हुई। साल 2017-18 में और कम होकर 7 लाख 19 हजार 950 रुपए रह गई। फिर साल 2018-19 में आमदनी बढ़कर 26 लाख 30 हजार 560 रुपए हुई। 

शक्ति प्रदर्शन के साथ आदित्य ने किया नामांकन 

ठाकरे परिवार की परंपरा को तोड़ते हुए शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे व युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे विधानसभा चुनाव के मैदान में कूद गए हैं। गुरुवार को आदित्य ने मुंबई की वरली विधानसभा सीट से पर्चा दाखिल किया। इस मौके पर आदित्य के पिता शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे और मां रश्मी ठाकरे व भाई तेजस ठाकरे भी मौजूद थे। 
               

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।