दैनिक भास्कर हिंदी: कोटा: जेके लोन अस्पताल में 9 और नवजात की मौत, एक महीने में मृतकों की संख्या बढ़कर 100 हुई

January 2nd, 2020

हाईलाइट

  • जीवन रक्षक उपकरणों की कमी हो सकती है बच्चों के मौत की वजह
  • 23-24 दिसंबर को 48 घंटे के भीतर अस्पताल में 10 शिशुओं की मौत हुई थी
  • अस्पताल के अधिकारियों ने कहा 2018 में 1,005 शिशुओं की मौत हुई थी

डिजिटल डेस्क, कोटा। कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर के अंतिम दो दिन में करीब 9 और नवजात बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही एक महीने में अस्पताल में मरने वाले शिशुओं की संख्या 100 हो गई है। अधिकारियों ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।

गौरतलब है कि 23-24 दिसंबर को 48 घंटे के भीतर अस्पताल में 10 शिशुओं की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि यहां 2018 में 1,005 शिशुओं की मौत हुई थी और 2019 में उससे कम मौतें हुई हैं। अस्पताल के अधीक्षक के अनुसार अधिकतर शिशुओं की मौत मुख्यत: जन्म के समय कम वजन के कारण हुई।

एक ही बेड पर दो-तीन बच्चों का लेटाया जा रहा 
मंगलवार को लॉकेट चटर्जी, कांता कर्दम और जसकौर मीणा समेत बीजेपी सांसदों के एक संसदीय दल ने अस्पताल का दौरा कर उसकी हालत पर चिंता जताई थी। दल ने कहा कि एक ही बेड पर दो-तीन बच्चे थे और अस्पताल में पर्याप्त नर्सें भी नहीं हैं। इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य की कांग्रेस सरकार को नोटिस जारी किया था। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा था कि अस्पताल परिसर के भीतर सुअर घूमते पाए गए। माना जा रहा है कि बच्चों के मौत की वजह जीवन रक्षक उपकरणों की कमी हो सकती है। 

535 जीवन रक्षक उपकरणों में से 320 काम नहीं कर रहे
सूत्रों ने कहा कि 535 जीवन रक्षक उपकरणों में से 320 काम नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा 71 इंफेंट वामर्स में से सिर्फ 27 काम कर रहे हैं। कुछ वेंटिलेटर भी सही तरह से काम नहीं कर रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इससे इनकार किया है। सीएमओ के सूत्रों ने पुष्टि की कि गहलोत मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और खुद जांच की निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि सभी बच्चों को अस्पताल में गंभीर हालत में लाया गया था।