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विधान परिषद प्रश्नोत्तर : जलयुक्त शिवार की खत्म हो चुकी है अवधि, नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग के जुड़ी जांच पूरी

विधान परिषद प्रश्नोत्तर : जलयुक्त शिवार की खत्म हो चुकी है अवधि, नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग के जुड़ी जांच पूरी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश के मृद व जलसंरक्षण मंत्री शंकरराव गडाख ने कहा है कि जलयुक्त शिवार योजना बंद करने का सवाल पैदा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जलयुक्त शिवार अभियान का साल 2018-19 आखिरी वर्ष था। इस अभियान की समयावधि 31 दिसंबर 2019 तक ही बढ़ाई गई थी। विधान परिषद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में गडाख ने कहा कि जलयुक्त शिवार अभियान के तहत साल 2015 से 2019 के बीच 22 हजार 586 गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में जलसंरक्षण के 6 लाख 32 हजार 708 काम हुए हैं। इन कामों पर अभी तक 9 हजार 707 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। शेकाप के सदस्य जयंत पाटील, भाजपा के सदस्य गिरीश व्यास, भाजपा सदस्य अनिल सोले सहित सदन के अन्य सदस्यों ने सवाल पूछा था। 

नागपुर परिमंडल में रिक्त हैं विशेषज्ञ डाक्टरों के 221 पद 

नागपुर परिमंडल के अंतर्गत महाराष्ट्र चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवा के तहत आने वाले विशेषज्ञों के 485 में से 221 पद रिक्त हैं। जबकि 264 पद भरे गए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने विधान परिषद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। टोपे ने बताया कि फिजिशियन के 18, बालरोग विशेषज्ञ के 51, जनरल सर्जन के 12, स्त्रीरोग व प्रसुति विशेषज्ञ के 60, नेत्ररोग विशेषज्ञ के 9, बधिरीकरण विशेषज्ञ के 68, अस्थिरोग विशेषज्ञ के 3 पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारी व आईपीएचएस के तहत विशेषज्ञ अधिकारी उपलब्ध कराए जाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत अस्थायी रूप से विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है। एक अन्य सवाल के जवाब में टोपे ने बताया कि नागपुर के राज्य कामगार बीमा अस्पताल में विशेषज्ञों के 13 पद मंजूर किए गए हैं। इसमें से 5 पद रिक्त हैं। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के 165 में से 56 पदों पर भर्ती हुई है। भाजपा सदस्य अनिल सोले, नागो गाणार, रामदास आंबटकर, परिणय फुके व राकांपा सदस्य प्रकाश गजभिए ने इस संबंध में सवाल पूछा था। 

महिलाओं ने अपनी मर्जी से करवाए गर्भाशय ऑपरेशन

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि बीड़ जिले में डॉक्टरों द्वारा मजबूर करने के चलते महिलाओं ने गर्भाशय नहीं निकलवाए हैं। टोपे ने कहा कि सरकार ने जांच में पाया है कि गर्भाशय निकालने का फैसला महिला और उसके परिवार का होता है। गर्भाशय आपरेशन का प्रमुख कारण पीरियड की समस्या है। विधान परिषद में एक सवाल के लिखित जवाब में टोपे ने कहा कि किसी भी महिला ने यह शिकायत नहीं कि है कि कैंसर का डर दिखा कर मोटी कमाई करने के लिए डॉक्टरों ने गर्भाशय निकालने के लिए मजबूर किया है। राकांपा के सदस्य बाबाजानी दुर्राणी, राकांपा सदस्य सतीश चव्हाण, हेमंत टकले ने इस बारे में सवाल पूछा था। 

दो माह में हुई 3120 बच्चों की मौत

प्रदेश में नवंबर 2019 में 1621 बाल मृत्यु हुई है जबकि दिसंबर 2019 में बालमृत्यु का प्रमाण 1499 है। प्रदेश की महिला व बालविकास मंत्री यशोमती ठाकुर ने विधान परिषद में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। यशोमती ने बताया कि नवंबर महीने की तुलना में दिसंबर महीने में बच्चों की मौत की संख्या में कमी आई है। उन्होंने कहा कि कम वजन के बच्चे, डायरिया, न्यूमोनिया, एआरडीएस, कम दिनों में प्रसुति होने जैसे कारणों से बच्चों की मौत होती है। कांग्रेस सदस्य हुस्नबानू खलिफे, कांग्रेस सदस्य रामहरी रुपनवर, कांग्रेस सदस्य शरद रणपीसे ने इस बारे में सवाल पूछा था। 

नागपुर की बायोटेक कंपनी की जांच के लिए समिति

कचरे से खाद बनाने वाली नागपुर की हंजर बायोटेक कंपनी द्वारा की गई कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विभागीय आयुक्त की अगुआई में समिति गठित की जाएगी। मामले में दोषी पाए जाने पर मनपा और कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा में प्रश्नोत्तर के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने यह जानकारी दी। कांग्रेस के विकास ठाकरे, अमीन पटेल, भाजपा के विकास कुंभारे आदि सदस्यों ने इससे जुड़ा सवाल पूछा था। जवाब में मंत्री शिंदे ने बताया कि नागपुर के भांडेवाडी में कचरे की रिसाइकिलिंग करने वाली हंजर बायोटेक कंपनी ने 12 सौ मीट्रिक टन कचरे की रिसाइकिलिंग का वादा किया था लेकिन वह कंपनी 150 से 200 मीट्रिक टन कचरे का ही निस्तारण कर पा रही है। कंपनी की अकार्यक्षमता के चलते उस पर 2 हजार 115 करोड़ रुपए की जुर्माना लगाया गया है। कंपनी ने मनपा से ठगी कर 18 करोड़ 89 लाख 85 हजार 007 रुपए ले लिए हैं इसके अलावा कंपनी ने सारी मशीने और कबाड़ भी बेंच दिया है। इसके अलावा कचरे से बिजली बनाने से जुड़ी एक परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए हैं यह जल्द ही शुरू की जाएगी।

नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग के जुड़ी जांच पूरी

नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग के रास्ते में नेताओं, अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदने के आरोपों की जांच की जा चुकी है। लोकायुक्त इस मामले की छानबीन कर और शिकायतें सुनकर इस बाबत 9 मार्च 2018 को ही गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को जांच रिपोर्ट सौंप चुके हैं। विधानसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सार्वजनिक निर्माणकार्य मंत्री (सार्वजनिक उपक्रम) एकनाथ शिंदे ने यह जानकारी दी। कांग्रेस के पृथ्वीराज चव्हाण, सुलभा खोडके, अमीन पटेल आदि सदस्यों ने इससे जुड़े सवाल पूछे थे। चव्हाण ने विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल के दौरान जमीन अधिग्रहण की जांच की मांग की। चव्हाण ने कहा कि जो जांच की गई वह अधिसूचना के बाद हुई जमीन खरीदारी से जुड़ी है। लेकिन असल में जांच अधिसूचना के पहले जमीन खरीदने वालों की होनी चाहिए। क्योंकि कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों को इसके मार्ग की पहले से ही जानकारी हो गई थी और उन्होंने सस्ती दर पर जमीनें खरीद लीं थीं। इस मामले में पारदर्शी जांच की जरूरत है। हालांकि विपक्ष के शोरशराबे के बीच मंत्री जवाब नहीं दे पाए और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। लिखित जवाब में शिंदे ने परियोजना की कर्ज की ब्याजदर ज्यादा होने पर सफाई दी है कि कर्ज सरकार ने नहीं बल्कि महामंडल के जरिए लिया गया था।  

खतरनाक घोषित किया गया है रोहेरी बुद्रक पुल 

बुलढाणा जिले के राहेरी बुद्रुक में स्थित अंग्रेजों के जमाने का पुल यातायात के लिए खतरनाक हो गया है इसके बावजूद इस पर भारी वाहनों की आवाजाही हो रही है। विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सार्वजनिक निर्माणकार्य मंत्री अशोक चव्हाण ने यह स्वीकार किया है। शिवसेना से संजय गायकवाड ने इससे जुड़ा सवाल पूछा था जवाब में मंत्री चव्हाण ने बताया कि राष्ट्रीय महामार्ग पर होने के चलते इस पुल की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, औरंगाबाद के पास है। जल्द ही पुल के मरम्मत के लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।