विधान परिषद : निर्विरोध चुने जाएंगे शिंदे - सिंह, छह सीटों पर पर्चा वापसी का आखिरी दिन

November 25th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विधान परिषद की मुंबई स्थानीय प्राधिकारी सीट से निर्दलीय उम्मीदवार सुरेश कोपरकर ने चुनावी मैदान छोड़ दिया है। कोपरकर को कांग्रेस ने समर्थन दिया था। कोपरकर के पर्चा वापस लेने से विधान परिषद मुंबई स्थानीय प्राधिकारी की एक सीट से शिवसेना के उम्मीदवार सुनील शिंदे और दूसरी सीट से भाजपा उम्मीदवार राजहंस सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। क्योंकि मुंबई स्थानीय प्राधिकारी की 2 सीटों पर अब दो ही उम्मीदवार बचे हैं। शुक्रवार को विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी कोटे की छह सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन है। इसके बाद ही स्पष्ट हो जाएगा कि चुनाव में कितने उम्मीदवार मैदान में हैं। 6 सीटों पर 10 दिसंबर को चुनाव होना है। लेकिन इसमें से मुंबई की 2 सीटों पर चुनाव निर्विरोध होना तय है। विधान परिषद की नागपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार चंद्रशेखकर बावनकुले और कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र उर्फ छोटू भोयर के बीच मुकाबला है। अकोला-बुलढाणा-वाशिम सीट पर शिवसेना उम्मीदवार गोपीकिशन बाजोरिया और भाजपा उम्मीदवार वसंत खंडेलवाल, धुलिया-नंदूरबार सीट पर भाजपा उम्मीदवार अमरिश पटेल और कांग्रेस प्रत्याशी गौरव वानी चुनाव में उतरे हैं। जबकि कोल्हापुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी तथा राज्य के गृह राज्य मंत्री सतेज पाटील और भाजपा उम्मीदवार अमल महाडिक के बीच चुनावी घमासान होना है। 

26/11 के हमलावरों की सिंह ने की मदद-पूर्व एसीपी पठान

महाराष्ट्र पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त रहे शमशेर खान पठान ने परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान ने मुंबई के पुलिस आयुक्त और राज्य के गृहमंत्री को पत्र लिखकर दावा किया है कि सिंह ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब उसके साथियों और हैंडलरों की मदद की थी। पठान का दावा है कि पकड़े जाने के बाद कसाब के पास से एक मोबाइल फोन मिला था जिसके जरिए वह पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से संपर्क में था। लेकिन सिंह ने यह मोबाइल अपने पास रख लिया और जांच अधिकारियों को नहीं सौंपा। पठान ने पत्र में लिखा है कि कसाब को जब गिरगांव चौपाटी इलाके में पकड़ा गया तो वहां डीबी मार्ग पुलिस के तत्कालीन सीनियर इंस्पेक्टर एनआर माली भी मौजूद थे। उस समय पठान मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में बतौर सीनियर इंस्पेक्टर नियुक्त थे। पठान का दावा है कि उन्होंने कसाब के पकड़े जाने के बाद माली से फोन पर बात की। इस दौरान माली ने उन्हें बताया कि कसाब के पास से मोबाइल बरामद हुआ है। यह फोन पहले कांबले नाम के कांस्टेबल के पास था जिसे आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के तत्कालीन प्रमुख परमबीर सिंह ने लेकर अपने पास रख लिया। पठान के मुताबिक इस मोबाइल के जरिए कसाब के पाकिस्तान में बैठे आकाओं के साथ उसके देश में मौजूद हैडलरों की भी जानकारी मिल सकती थी। लेकिन सिंह ने वह फोन मामले के जांच अधिकारी या किसी अदालत या एजेंसी को नहीं सौंपा। बाद में माली ने सिंह से मुलाकात कर इस बारे में बात करने की कोशिश की तो नाराज सिंह ने उन्हें अपने ऑफिस से निकाल दिया। बाद में माली ने आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की तो उसमें भी मोबाइल बरामद होने की बात दर्ज नहीं थी। पठान ने आशंका जताई कि सिंह ने सबूतों को नष्ट किया और वे आपराधिक साजिश में शामिल थे। उन्होंने शिकायत दर्ज कर मामले की छानबीन की मांग की।