दैनिक भास्कर हिंदी:  सीएमओ के घर लोकायुक्त का छापा - नकद मिले महज 33 सौ रुपए

May 31st, 2019

डिजिटल डेस्क, सतना। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की शिकायत पर लोकायुक्त की 40 सदस्यीय टीम ने गुरुवार को चित्रकूट नगर पंचायत के सीएमओ रमाकांत शुक्ला के यहां एमपी नगर के घर और उनके चित्रकूट स्थित सरकारी आवास पर एक साथ छापे मारे। बाद में उनके पटना कला स्थित पैतृक घर में भी दबिश दी गई। लोकायुक्त के सीनियर इंस्पेक्टर हितेन्द्रनाथ शर्मा ने माना कि सीएमओ के घर से मिली 33 सौ रुपए की नकदी खर्च के लिए तत्काल वापस कर दी गई थी। जबकि बैंक में 3 लाख 76 हजार रुपए की जमा राशि पाई गई। उनके मकान का अनुमानित मूल्य 25 लाख रुपए आंका गया है। दावे के मुताबिक पड़ताल अभी जारी है। इससे पहले लोकायुक्त की 25 सदस्यीय टीम ने यहां सीनियर इंस्पेक्टर हितेन्द्र नाथ शर्मा के नेतृत्व में और 15 सदस्यीय दल ने डीएसपी बीके पटेल की अगुआई में चित्रकूट एक साथ सुबह 5 बजे छापे मारे। 

5 वर्ष पुरानी शिकायत पर कार्रवाई  
बताया गया है कि चित्रकूट नगर पंचायत के मौजूदा सीएमओ रमाकांत शुक्ला के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत वर्ष 2015 में लोकायुक्त भोपाल में एक भाजपा नेता ने तब की थी,जब शुक्ला यहां सतना नगर निगम के अतिक्रमण अधिकारी थे। लोकायुक्त के हत्थे चढ़े चित्रकूट सीएमओ वर्ष 1984 में रमाकांत शुक्ला ने निम्न श्रेणी लिपिक के तौर पर नगर निगम के सेवा की शुुरुआत की थी। 1993 में उन्हें नियमित किया गया था।  

ले गए डेबिट कार्ड 
सीएमओ रमाकांत शुक्ला के मुताबिक उनके घर में भतीजे की बेटी की शादी है। भतीजे  के निधन के कारण अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी के निर्वाह के लिए उन्होंने फंड ग्रेजुटी की राशि अपने बैंक खाते में जमा कराई थी,लेकिन आग्रह के बाद भी लोकायुक्त के आफीसर उनका डेबिट कार्ड भी जब्त करके अपने साथ ले गए। 

सरकारी संपत्ति का मूल्य भी हिसाब में 
सीएमओ के आरोप के अनुसार चित्रकूट के आवास से इन्वेंट्री मद में जोड़ी गई 1 लाख 23 हजार 269 रुपए की राशि उनके स्वत्व की संपत्ति नहीं है। ये उन्हें पूर्व सीएमओ से प्रभार में मिली थी। इसके दस्तावेज भी लोकायुक्त के समक्ष पेश किए गए हैं।

घर के लिए 7 लाख का कर्ज  
सीएमओ रमाकांत शुक्ला ने स्पष्ट किया कि एमपी नगर में घर के निर्माण के लिए उन्होंने बैंक से 5 लाख रुपए और विभागीय तौर पर 2 लाख रुपए के ऋण लिए थे। सीएमओ ने कहा कि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अपराध दर्ज करने से पहले वर्ष 2015 में उनके बेटे की आमदनी के दावे को खारिज करते हुए लोकायुक्त ने एक तरफा अपराध दर्ज कर लिया था।

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