बेबाक बजाज: विदर्भ से काफी लगाव था, लेकिन इंडस्ट्री नहीं लगाई

February 13th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर. देश के मशहूर उद्योगपति राहुल बजाज का विदर्भ से बहुत गहरा नाता था। उनका परिवार वर्धा में रहता था, जिनसे मिलने के लिए वे कई बार यहां आया करते थे। नागपुर के उद्योजक हरगोविंद बजाज से उनके काफी करीबी संबंध थे। वे फ्लाइट से नागपुर आते थे और यहां से सड़क मार्ग से वर्धा जाते थे। जब भी वे नागपुर आते हरगोविंद बजाज के घर जरूर आते थे। हरगोविंद बजाज के नवासे वरुण बजाज ने बताया कि आखिरी बार राहुल बजाज 15 सितंबर 2019 को नागपुर आए थे। वे नागपुर में कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रह चुके हैं। विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा एक इंटैरेक्शन मीट का आयोजन किया गया था, जिसमें राहुल बजाज मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। 

बेताज बादशाह थे

वीआईए के वर्तमान अध्यक्ष सुरेश राठी ने बताया कि राहुल बजाज ऑटोजगत के बेताज बादशाह थे। वे बड़े ही बेबाकी और स्पष्ट रूप से अपनी राय रखते थे। हमने कई बार उन्हें वीआईए के उद्योग गौरव पुरस्कार कार्यक्रम में बुलाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं आ पाए। 

बेबाकी से अपनी राय रखते थे

कार्यक्रम के दौरान राहुल बजाज से यहां पर इंडस्ट्री लगाने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर मना कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री को लगाने के लिए इकोसिस्टम होना बहुत जरूरी है और नागपुर में वह माहौल नहीं है। कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स के अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने बताया कि राहुल बजाज बहुत ही सुलझे हुए और स्पष्ट बोलने वाले व्यक्ति थे। वे बड़े ही बेबाकी से अर्थव्यस्था में आ रही दिक्कतों पर अपनी राय रखते थे। उन्होंने कई बार नागपुर आकर यहां के कारोबारियों से संवाद साधा व यहां के उद्यमियों को प्रोत्साहित किया। विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष मोहन अग्रवाल ने राहुल बजाज के निधन पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि वीआईए में 2 से 3 बार राहुल बजाज के व्याख्यान हो चुके हैं। किसी भी व्याख्यान में आने से पहले उनकी मांग यंगस्टर्स को बुलाने की रहती थी। उनके व्याख्यान में 1500 युवाओं को बुलाया गया था। एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम में सभी ने बड़े ही ध्यान से उनकी बातों को सुना। कैमिट के अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल ने बताया कि वे कई बार राहुल बजाज के व्याख्यान सुन चुके हैं। उनके अनुसार राहुल बजाज के व्याख्यान सुनना अपने आप में सौभाग्य की बात होती थी। उनकी मौत से संपूर्ण उद्योग जगत को नुकसान हुआ है। वीआईए के पूर्व अध्यक्ष अतुल पांडे ने भी उनके निधन पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें विदर्भ से काफी लगाव था। 
 

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