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पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सबसे आगे है महाराष्ट्र, तीन साल में 342 केस

पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सबसे आगे है महाराष्ट्र, तीन साल में 342 केस

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महानगर के वडाला टीटी पुलिस स्टेशन में हिरासत में विजय सिंह नाम के युवक की मौत के बाद राज्य में एक बार फिर पुलिस सवालों के घेरे में हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि हिरासत में मौत के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है यही नहीं। महाराष्ट्र में ही पुलिसवालों के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में देशभर में पुलिस हिरासत में 342 लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं जिनमें से 68 की मौत महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में हुई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात आते हैं जहां क्रमश: 36 और 34 मौते पुलिस हिरासत में हुईं हैं। हाल ही में जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में देशभर में कुल 100 लोगों ने पुलिस हिरासत में जान गंवाई जिसमें से 15 लोगों की मौत महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में हुई। जान गंवाने वाले इन 15 लोगों में से 10 पुलिस रिमांड में थे। साल 2017 में पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले लोगों में सबसे ज्यादा 27 की मौत आंध्रप्रदेश में हुई थी। जबकी 10 मौतों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर है। पिछले तीन सालों में न्यायिक हिरासत में कुल 3420 कैदियों ने अपनी जान गंवाई है जिनमें उत्तर प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा 1140 कैदियों की मौत हुई है। इस दौरान महाराष्ट्र में जेल में बंद 365 कैदियों की मौत हुई है।

नहीं लगे सीसीटीवी

साल 2015 में हिरासत में हो रही मौतों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस स्टेशनों और पूछताछ कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। साथ ही हर पुलिस स्टेशन में दो महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करने को कहा गया था जो हिरासत में उत्पीड़न पर नजर रख सकें। लेकिन सरकार ने इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

अपराध में सबसे आगे महाराष्ट्र के पुलिसकर्मी

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में देशभर में कुल 2005 पुलिसवालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से करीब 23 फीसदी यानी 456 मामले महाराष्ट्र पुलिस में तैनात जवानों के खिलाफ दर्ज हुए हैं। सूची में दूसरे नंबर पर गुजरात है जहां 191 पुलिसवालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं जबकि राजस्थान में 169 पुलिस वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।