comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

आईएस से संबंधों के आरोपी मजीद की जमानत बरकरार, एनआईए ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती 

आईएस से संबंधों के आरोपी मजीद की जमानत बरकरार, एनआईए ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने आतंकी संगठन आईएसआईएस से कथित संबंध के आरोप में गिरफ्तार 27 वर्षीय युवक अरीब मजीद को निचली अदालत से मिली जमानत को बरकरार रखा है। मजीद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने जमानत दी थी। जिसे एनआईए ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। किंतु न्यायमूर्ति एसएस शिंदे व न्यायमूर्ति मनीष पीटले की खंडपीठ ने मजीद के मुकदमे की सुनवाई में रही देरी के मद्देनजर उसे निचली अदालत से मिली जमानत को कायम रखा।

मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि तेजी से निष्पक्ष सुनवाई पाना हर कैदी का संवैधानिक अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि यदि लंबे समय तक चली मुकदमे की सुनवाई के बाद आरोपी को निर्दोष पाया जाता है, तो इस अवधि के दौरान जेल में बीते समय को आरोपी को वापस नहीं लौटाया जा सकता। अब तक इस मामले की सुनवाई में पांच साल का समय बीत चुका है। मामले से जुड़े 50 गवाहों की गवाही हुई है। अभी 107 गवाहों की गवाही बाकी है। ऐसे में जल्द ही इस मामले की सुनवाई पूरी होने की संभावना नजर नहीं आती है। इसलिए आरोपी को जमानत दी जाती है।

खंडपीठ ने मजीद को एक लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दी है और उसे कल्याण इलाके से बाहर न जाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी को नियमित अंतराल पर पुलिस स्टेशन में हाजरी लगाने को भी कहा है। 

एनआईए की ओर से पैरवी करनेवाले एडिशनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह ने दावा किया था कि मजीद आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ने के लिए सिरिया गया था और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से लौटा था। लेकिन उसे भारत पहुंचते ही नवंबर 2014 में एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया था। मजीद पर अवैध गतिविधि प्रतिबंधक कानून व भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जिसके तहत मदीज पर देश के खिलाफ युध्द छेड़ने का आरोप है।

इसक पहले मजीद ने कोर्ट में दावा किया था कि वह सीरिया में लोगों की मदद करने के लिए गया था। इसके अलावा उसने एनआईए द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया था। मजीद को मार्च 2020 में निचली अदालत ने जमानत प्रदान की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। जिसके चलते जमानत मिलने के बावजूद मजीद जेल में था। 

कमेंट करें
k9F2G
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।