दैनिक भास्कर हिंदी: मराठा-कुनबी एक ही समुदाय, इसलिए मिले ओबीसी में जगह- पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

January 29th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मराठा व कुनबी दो अलग-अलग जातिया नहीं है। ये दोनों एक ही जाति व एक ही समुदाय के लोग है। मराठा समुदाय को लेकर राज्य पिछ़ड़ा  वर्ग आयोग की ओर से सौपी गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। कुनबी समुदाय को पहले से ओबीसी में शामिल किया गया है इसलिए मराठा समुदाय को काफी पहले ही पिछड़े वर्ग की श्रेणी के रुप में अधिसूचित कर देना चाहिए था। पूर्व न्यायाधीश एमजी गायकवाड की अध्यक्षता में काम करने वाले नौ सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने नवंबर 2018 में राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौपी थी। जिसके आधार पर राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को शिक्षा व नौकरी में 16 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके साथ ही मराठा समुदाय को समाजिक व शैक्षणिक रुप से पिछड़ी जाति घोषित किया है। मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बांबे हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को सौपने का निर्देश दिया था। अब याचिकाकर्ताओं को यह रिपोर्ट मिल चुकी है। 

1942 में पिछड़े वर्ग में शामिल किया गया था मराठा समुदाय 

रिपोर्ट के अनुसार 1942 में बांबे गवर्मेंट ने एक शासनादेश जारी किया था जिसमें पिछडी जातियों की सूची में मराठा समुदाय को शामिल किया गया था। सिर्फ शिक्षा के लिए इस सूची में मराठा समुदाय को इंटरमीडिएट  क्लास के रुप में दिखाया गया था। क्योंकि यह समुदाय शिक्षा के मामले में पिछड़ा था। 1942 में पहली बार मराठा समुदाय को शिक्षा में आरक्षण दिया गया था। आजादी के बाद 1950 में केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़े वर्ग जातियों की एक सूची जारी की थी, लेकिन 1942 में पिछडे वर्ग में नजर आनेवाला मराठा समुदाय केंद्र सरकार की ओर से 1950 में जारी की गई पिछड़े वर्ग जातियों की सूची से गायब हो गया। 1996 में सुधारित सूची तैयार की गई जिसमें कुनबी समुदाय को पिछड़े वर्ग (ओबीसी) में शामिल किया गया। इस आधार पर पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मराठा व कुनबी दो अलग-अलग जातिया नहीं है। दोनों एक ही जाति व एक ही समुदाय है। इसलिए मराठा समुदाय को भी ओबीसी में शामिल किया जाना चाहिए। कई रिपोर्ट व जानकारियों के आधार पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मराठा अपने आप में कोई जाति नहीं है ये मराठी बोलनेवालों का समूह है। इनकी जाति कुनबी है। जो की कृषक है। मराठा समाज सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक रुप से पिछड़ा है। इसलिए उसे हम पिछड़ा वर्ग मान रहे हैं। 

आत्महत्या करने वाले 23.56 फीसदी किसान मराठा 

आयोग की रिपोर्ट में सर्वाधिक आत्महत्या करनेवाले मराठा समुदाय के किसानों की मौत का भी संज्ञान लिया गया है। आयोग ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि साल 2013 से 2018 के बीच 13368 किसानों ने आत्महत्या की है इसमे से 23.56 प्रतिशत किसान मराठा समुदाय के है। और 19.34 प्रतिशत कुनबी समाज के किसान हैं। इन आकड़ों से मराठा समुदाय की निराशा व हताशा का अंदाजा लगया जा सकता है।