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मराठा आंदोलन की राज्य में फिर शुरु हुई सुगबुगाहट, आसान नहीं आरक्षण की राह

मराठा आंदोलन की राज्य में फिर शुरु हुई सुगबुगाहट, आसान नहीं आरक्षण की राह

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने अंतरिम आदेश के जरिए मराठा समाज को दिए गए आरक्षण पर रोक लगाए जाने के बाद एक बार फिर मराठा आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के अलग अलग इलाकों में मराठा आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। जबकि संविधान विशेषज्ञ व राज्य के पूर्व महाधिवक्ता श्री हरि अणे के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में मराठा आरक्षण की राह आसान नहीं दिख रही है।

अणे के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट मुख्य रुप से दो विषयों को देख रहा है। पहला क्या किसी भी राज्य में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं कई बार इस सवाल का जवाब न में दिया है। दूसरा विषय यह है कि क्या मराठा समुदाय एक वर्ग के रुप में सामाजिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक रुप से पिछड़ा है? इस पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। क्योंकि किसी समुदाय के कुछ लोग पिछड़े हो सकते है पूरा वर्ग कैसे पिछड़ा हो सकता है। संविधान आरक्षण के लिए वर्ग को पात्र नहीं मानता। श्री अणे ने स्पष्ट किया कि अब अध्यादेश के जरिए भी आरक्षण को कायम रखने के लिए कानून में गुंजाइश नहीं दिख रही है। कुल मिलाकर अब मराठा समुदाय के सामने पहले जैसी स्थिति सामने आ सकती है।

औरंगाबाद में सकल मराठा समुदाय की हुई बैठक में राज्य सरकार को मराठा समुदाय के आरक्षण को कायम रखने के लिए राज्य सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसे राज्य के नाशिक, कोल्हापुर, व सोलापुर सहित अन्य हिस्सों में भी मराठा समुदाय की ओर से उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी जा रही है। मराठा समुदाय फिर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर कर आक्रामक ढंग से अपनी बात रखने की योजना बना रहा है। इस कड़ी में पुणे-बेंगलोर महामार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन किया जा चुका है। 

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा समुदाय को शिक्षा व नौकरी में राज्य सरकार द्वारा दिए गए वैध ठराया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है। जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगा दी है। जिससे मराठा समुदाय में फिर से असंतोष व नाराजगी उभर रही है। 

 

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