दैनिक भास्कर हिंदी: किसानों के समर्थन में 15 जनवरी को मुंबई में निकलेगा मार्च

December 29th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कृषि कानून के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों समर्थन में आगामी 15 जनवरी 2021 को मुंबई में लांग मार्च निकाला जाएगा। किसान अलायंस के बैनर तले यह लांग मार्च जिजामाता उद्यान से आजाद मैदान के बीच निकाला जाएगा। सैकड़ों संगठनों ने मिलकर किसानों के समर्थन में किसान अलायंस का गठन किया है। पिछले एक महीने से दिल्ली में किसान अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों के इस प्रदर्शन को आम लोगों का भी समर्थन है। यह दर्शाने के लिए किसान अलायंस की ओर से 15 जनवरी को मुंबई में लांग मार्च निकाला जाएगा। अलायंस ने मांग की है कि किसानों की मांग को मंजूर करते हुए तीनों कृषि कानून को रद्द किया जाए और किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किए जाने से जुड़ी मांग भी मंजूर की जाए। इस संबंध में हुई बैठक में पूर्व न्यायमूर्ति बीजी कोलसे पाटील, अधिवक्ता राकेश राठौड़ व मुंबई अमन कमेटी के अध्यक्ष फरीद शेख सहित कई संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित थे। 

सकारात्मक परिणाम निकला तो घर वापसी, नहीं तो देशव्यापी आंदोलन-डॉ ढवले

उधर नई दिल्ली में आंदोलन बढ़ता जा रहा है। नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 33 दिनों से जारी किसान आंदोलन के मसले पर किसान संगठनों और सरकार के बीच बुधवार को 7वें दौर की बैठक होगी। संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा की हम उम्मीद करते है कि सरकार इस बैठक में कुछ सकारात्मक निर्णय जरुर लेगी। किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक ढवले ने कहा कि किसानों की बात मानी गई तो घर वापसी करेंगे। अन्यथा यह प्रदर्शन केवल दिल्ली की सीमा पर ही नहीं, बल्कि देशव्यापी और तीव्र होगा। डॉ ढवले ने कहा कि सरकार इस आंदोलन को दबाने की भरसक कोशिश कर रही है, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही है। इसलिए वह तरह-तरह के हथखंडे अपना रही है। एक सवाल के जवाब में ढवले कहते है कि कुछ किसान संगठन अगर नए कृषि कानूनों के पक्ष में है और यह कानून किसानों के हित में है तो वह इसके लिए सड़कों पर क्यों नहीं उतर रहे है? सरकार को पत्र सौंपकर नए कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले यह सरकार के ही खड़े किए हुए लोग है।

किसानों के परिजनों को सरकार दे 1 करोड़ मुआवजा

दूसरी तरफ किसान कांग्रेस ने भी कहा है कि अगर नए कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया गया तो वह देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगी। अगर कानूनों की वापसी होगी तो हम घर जायेंगे वरना नहीं जायेंगे। किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सोलंकी ने कहा कि कड़ाके की सर्दी में हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर जमा हो गए है और पिछले एक महीने में हमारे 40 से ज्यादा किसानों की मोत हो चुकी, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार जो कॉरपोरेट्स की कठपुतली बन गई है, वह अपने काले कानूनों को वापस लेने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने आंदोलन के दौरान शहीद हो चुके किसानों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग की।

सरकार के साथ किसानों के एजेंडे पर होगी बात : योगेन्द्र यादव 

किसान नेता व स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव को सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच कल होने वाली सातवीं बैठक से ज्यादा उम्मीद नहीं है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तेवर देखकर नहीं लगता कि सरकार किसानों की मांग मानने को तैयार है। इसके साथ ही उन्होने साफ कर दिया है कि कल की बैठक में किसानों के एजेंडे पर बातचीत होगी। इस एजेंडे के चार बिंदु हैं। योगेन्द्र यादव ने कहा कि बैठक में इस पर चर्चा नहीं होगी कि कृषि कानून खत्म करेंगे या नहीं। चर्चा इस पर होगी कि सरकार इन कानूनों को रद्द कैसे करेगी, अध्यादेश से या कानून लाकर? दूसरा मुद्दा एमएसपी का है और सरकार से पूछा जाएगा कि एमएसपी को कानूनी गारंटी बनाने का तरीका क्या होगा? किसान चाहते हैं कि उन्हें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक फसल की संपूर्ण लागत का डेढ़ गुणा दाम कानूनी हक की तरह मिले। हर किसान को हर फसल पर एमएसपी हक की तरह मिले, दान की तरह नहीं। तीसरे नंबर पर किसान चाहते हैं कि पराली जलाने पर किसानों पर लगने वाली पेनाल्टी का प्रावधान हटाया जाए। अंत में हमारी मांग है कि सरकार किसान विरोधी बिजली बिल का ड्राफ्ट वापस ले। हालांकि योगेन्द्र यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ज्यादा संभावना है कि कल शाम को भी हम फिर वहीं खड़े होंगे, जहां आज खड़े हैं। ऐसे में संघर्ष तेज करने की हमारी पूरी तैयारी रहनी चाहिए।

किसान आंदोलन के चलते दिल्ली के कई बॉर्डर हैं बंद

किसान आंदोलन के 35वें दिन बुधवार को सरकार और किसानों के बीच बातचीत होगी। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की वजह से दिल्ली के कुछ बॉर्डर पूरी तरह तो कुछ बॉर्डर एक तरफ से बंद हैं। ऐसे में हरियाणा, उत्तरप्रदेश और राजस्थान से दिल्ली आने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच आंदोलनरत किसानों ने बुधवार की बैठक में बात नहीं बनने की स्थिति में नए साल में दिल्ली की सीमाओं पर अपनी संख्या और बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। किसान आंदोलन का केन्द्र बना सिंघु बॉर्डर पहले दिन से आवाजाही के लिए पूर्णत: बंद है तो वहीं टिकरी बॉर्डर का भी यही हाल है। किसानों ने टेंट लगाकर यहां अपना डेरा जमा लिया है। इन दोनों जगह पर मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के किसान डटे हैं। हरियाणा से लगा सिंघु और टिकरी बॉर्डर जहां पूरी तरह बंद है तो वहीं औचंदी और साफियाबाद बॉर्डर भी एक तरफ से बंद है। उत्तरप्रदेश के किसानों ने गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर पर अपना कब्जा जमा रखा है। ये दोनों बॉर्डर पिछले 22 दिनों से एक तरफ से बंद हैं। मतलब इस रास्ते आप उत्तरप्रदेश से दिल्ली नहीं आ सकते। इसी प्रकार दिल्ली और राजस्थान के बीच के शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर को भी राजस्थान के किसानों ने एक तरफ से बंद कर रखा है। मतलब इस रास्ते आप राजस्थान से दिल्ली की ओर नहीं आ सकते। हालांकि दिल्ली से लगा लोनी बॉर्डर, महाराजपुर बॉर्डर, दिलशाद गार्डन रोड, मथुरा रोड, दिल्ली-गुड़गांव रोड, पियानो रोड, मंगेश बॉर्डर, सबोल बॉर्डर और झटिकरा बॉर्डर पूरी तरह से खुले हुए हैं। 

छुट्टी के दिन भी कृषि भवन पहुंच रहे तोमर! 

किसान आंदोलन का असर दिल्ली के बाहरी इलाकों में तो दिख रहा है, परंतु राजधानी के अंदर गतिविधियां लगभग सामान्य हैं। आंदोलन के चलते कृषि भवन में हलचल बढ़ी हुई हैं, क्योंकि यहां कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और संबंधित अधिकारी नियमित रूप से पहुंच रहे हैं। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आंदोलन के चलते मंत्री जी कई बार शनिवार और रविवार को भी कार्यालय पहुंच रहे हैं। तोमर किसान आंदोलन को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से लगातार संपर्क में रहते हैं। कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ तो उनकी बैठक विज्ञान भवन में होती है। लेकिन इस कानून का समर्थन करने पहुंच रहे किसानों से वे कभी कृष्णमेनन मार्ग स्थित अपने आवास पर मिलते हैं तो कई बार अपने कार्यालय में। 

बैठक को लेकर किसानों में है मिश्रित सोंच

किसान और सरकार के बीच 30 दिसंबर को होने वाली सातवें दौर की बैठक को लेकर किसान संगठनों के बीच मिली जुली प्रतिक्रिया है। बैठक में हिस्सा लेने जा रहे पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रूलदू सिंह मोदी सरकार के रवैए से खफा हैं। इसे ‘निकम्मी सरकार’ बताते हुए वे कहते हैं कि मुझे बुधवार की बैठक से ज्यादा उम्मीद नहीं है। वहीं वार्ता में शामिल राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ को उम्मीद है कि इस बैठक में सरकार उनकी मांगों को जरूर मानेगी और गतिरोध खत्म करने के लिए प्रभावी निर्णय लेगी। साथ में उन्होने यह भी जोड़ा कि यदि बात नहीं बनी तो एक जनवरी से आंदोलन और तीव्र होगा। इसके लिए सभी किसान संगठनों को जरूरी निर्देश दिए जा चुके हैं।
 

 

    


 

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