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500 स्कूलों में 10 सेंट्रल किचन शेड के माध्यम से भेजा जा रहा मिड डे मील

500 स्कूलों में 10 सेंट्रल किचन शेड के माध्यम से भेजा जा रहा मिड डे मील

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत हर बच्चे को उम्र के 14 वर्ष तक नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया है। देश में आलम यह है कि सरकारी तथा सरकारी अनुदान पर चलने वाले स्कूलों में विद्यार्थी संख्या तेजी से घट रही है। इसे रोकने तथा विद्यार्थियों को पूरक पोषण आपूर्ति करने की दृष्टि से मध्याह्न आहार योजना चलाई जाती है। हाईकोर्ट ने मनपा तथा नगर परिषद क्षेत्रों में राज्य के शिक्षा विभाग को सेंट्रल किचन शेड से मध्याह्न भोजन आपूर्ति करने के आदेश दिए थे। मनपा सहित शहर के 500 स्कूलों में 10 सेंट्रल किचन शेड के माध्यम से मध्याह्न भोजन आपूर्ति की जा रही है। 300 स्कूल अभी भी सेंट्रल किचन के मध्याह्न भोजन से वंचित हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के मध्याह्न भोजन की जिम्मेदारी संबंधित स्कूलों के मुख्याध्यापकों के कंधों पर है।

केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत सरकारी तथा निजी अनुदानित स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। शहर में मनपा के 158 स्कूल हैं। मनपा स्कूलों में महिल बचत समूह के माध्यम से मध्याह्न भोजन आपूर्ति की जाती थी। निजी अनुदानित स्कूलों में मुख्याध्यापक पर मध्याह्न भोजना की जिम्मेदारी दी गई थी। स्कूल के किचन शेड में भोजन बनाकर विद्यार्थियों को दिया जाता रहा। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर बार-बार सवाल उठते रहे। मामला न्यायालय तक जा पहुंचा। हाईकोर्ट के आदेश पर 1 जुलाई से नागपुर शहर में सेंट्रल किचन शेड से मध्याह्न भोजन आपूर्ति की शुरुआत की गई। मनपा क्षेत्र में 9 आपूर्ति एजेंसियों के साथ अनुबंध कर 10 किचन शेड के माध्यम से 500 स्कूलों में मध्याह्न भोजन आपूर्ति की जा रही है। 8 एजेंसियों को प्रत्येक एक किचन शेड और एक एजेंसी को 2 किचन शेड चलाने की ओर से ठेका दिया गया है।

हजारों विद्यार्थी भोजन से वंचित

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनपा ने अपने कार्यक्षेत्र के सभी स्कूलों में चालू शैक्षणिक सत्र में सेंट्रल किचन शेड से मध्याह्न भोजन आपूर्ति करने की हामी भरी थी। आधा शैक्षणिक सत्र समाप्त होने जा रहा है। अभी भी शहर के 300 स्कूलों में सेंट्रल किचन शेड से मध्याह्न भोजन आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट के आदेश पर मनपा खरी नहीं उतरने से आज भी हजारों विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन से वंचित हैं।
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।