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दैनिक भास्कर हिंदी: आईटी राज्यमंत्री श्री संजय धोत्रे ने मल्टीफंक्शनल इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स एंड प्रोसेसिंग- 2021 से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

March 9th, 2021

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय आईटी राज्यमंत्री श्री संजय धोत्रे ने मल्टीफंक्शनल इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स एंड प्रोसेसिंग- 2021 से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी 2012 में 1.3% से बढ़कर 2019 में 3.6% हो गई: श्री संजय धोत्रे एमईएमपी - 2021 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और युवा छात्रों को विभिन्न अनुप्रयोगों और उपकरणों के निर्माण के उद्देश्य से उन अनुप्रयोगों के प्रसंस्करण के लिए मल्टीफंक्शनल इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स के क्षेत्र में काम करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिकों / प्रौद्योगिकीविदों के साथ बातचीत करने का एक अवसर प्रदान करेगा।

केन्द्रीयशिक्षा, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकीराज्यमंत्रीश्री संजय धोत्रे ने सेंटर फॉर मटीरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सी-मेट) के 30वें स्थापना दिवस के अवसर परआज मल्टीफंक्शनल इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल्स एंड प्रोसेसिंग (एमईएमपी 2021) से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव श्री अजय साहनी; इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) में विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकारसुश्री ज्योति अरोड़ा; नीति आयोगके सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत;राजगीर स्थितनालंदा विश्वविद्यालयके कुलपतिडॉ. विजय भाटकर; कोरिया गणराज्य के सीएमसीएम के निदेशक प्रोफेसर रॉडनी एस. रुओफ्फ सहित कई गणमान्य व्यक्ति आभासी माध्यम सेइस सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर बोलते हुए,श्री धोत्रे ने कहा कि "इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और उसके अवयव सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मूल तत्व हैं। ये सामग्रियां किसी भी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र की क्षमता और कार्यकुशलता की रीढ़ है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का प्रदर्शन सीधे उसमें इस्तेमाल किए गए घटकों पर निर्भर करता है।

नई उभरती हुई सामग्रियों से जुड़े अनुसंधानएवं विकास कार्य में पर्याप्त वित्तीय सहायता लगातार प्रदान की गई है।हालांकि, अनुसंधान एवं विकास कार्यों का व्यावसायीकरण एक चुनौती है।इसलिए, अनुसंधान एवं विकास कार्यों और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के उत्पादन के बीच के अंतर को पाटने के उद्देश्य से 1990 में सी-मेट की स्थापनाकी गई थी।" उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्रजी मोदी के कुशल नेतृत्व और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद के मार्गदर्शन में, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का घरेलू उत्पादन काफी हद तक बढ़ा है। वर्ष2014-15 में यह उत्पादन 1,90,000 करोड़ रूपये से अधिक का था, जो 23% की वार्षिक वृद्धि की चक्रवृद्धि दर से बढ़कर वर्ष 2019-20 में 5,33,550 करोड़ रूपयेका हो गया।उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी 2012 में 1.3% से बढ़कर 2019 में 3.6% हो गई है। ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की भावना ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा दिया है, जो खासतौर पर मोबाइल फोन और उससे संबंधित एक्सेसरीज की 200 से अधिक उत्पादन इकाइयों और लगभग 6.3 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन के रूप में दिखाई देती है।

मोबाइल फोन के उत्पादन में भी खासा उछाल आया है। वर्ष 2014-15 में जहां लगभग 6 करोड़ मोबाइल फोन का उत्पादन हो रहा था,वह2019-20 मेंबढ़कर लगभग 33 करोड़ मोबाइल फोन हो गया है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को प्रोत्साहन आने वाले वर्षों में डिजिटल इंडिया का एक प्रमुख तत्व होगा। श्री धोत्रे ने तकनीकी नवाचारों के लिए सी-मेट की सराहना की।उन्होंने कहा कि "मुझे इस बात की खुशी है कि सी-मेट महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और देश की सेवा करने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के क्षेत्र में अनूठी विशेषज्ञता विकसित कर रहा है। मुझे इस तथ्य पर गौरकरते हुए भी खुशी हो रही है कि सी-मेट वर्षों से रणनीतिक क्षेत्रों(डीआरडीओ एवंइसरो) के लिएविश्वसनीय स्रोत के रूप में हैफेनियम और सिलिकॉन कार्बाइड का उत्पादन कर रहा है।"उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा उपकरणों, फोटोनिक्स और अंतरिक्ष अनुसंधान संचार के क्षेत्र में अनुप्रयोगों के साथ उच्च स्तर के अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के व्यापक क्षेत्रों में नवाचार की उल्लेखनीय गति बनाए रखी गई है।