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पवार ने कहा- मोदी ने दिया था साथ आने का न्यौता, अजित ने माना हो गई चूक

पवार ने कहा- मोदी ने दिया था साथ आने का न्यौता, अजित ने माना हो गई चूक

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना से हुए विवाद के बाद भाजपा विपक्षी दल राकांपा के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती थी। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोशिश की थी। मोदी पवार की बेटी व सांसद सुप्रिया सुले को केंद्र सरकार में मंत्री भी बनाना चाहते थे। लेकिन राकांपा के सुप्रीमो शरद पवार ने मोदी का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। सोमवार को एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में पवार ने खुद यह बड़ा खुलासा किया। पवार ने कहा कि संसद में प्रदेश के किसानों की मदद को लेकर मेरी मोदी के साथ बैठक हुई थी। बैठक खत्म होने के बाद मैं उठ रहा था। तभी मोदी ने मुझे रोक लिया। मोदी ने मुझसे कहा कि हमें आपके साथ मिलकर काम करने में खुशी होगी।

फिर मैंने मोदी से कहा कि आपके साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और वह रहेंगे। लेकिन भाजपा के साथ मुझे काम करना राजनीतिक रूप से संभव नहीं है। फिर मोदी ने मुझसे पूछा कि भाजपा और राकांपा के विचारों में कोई भिन्नता नहीं दिखती। विकास और उद्योगों के बारे में दोनों दलों की भूमिका मिलती जुलती है। हमें साथ में आकर देश के लिए काम करना चाहिए। जिस पर मैंने मोदी से कहा कि किसी राजनीतिक मुद्दों के समाधान को लेकर राकांपा का कभी भी विरोध नहीं रहेगा, लेकिन मैं महाराष्ट्र में एक छोटी पार्टी चलाता हूं। मेरी पार्टी से देश नहीं बल्कि महाराष्ट्र में अधिक लोग जुड़े हैं। मैंने उन्हें एक दिशा दी है। इस दिशा के विपरीत मैं नहीं जा सकता। यह मेरे लिए संभव नहीं है। मैंने मोदी को विनम्रता से साथ आने से मना कर दिया।

पवार ने यह भी साफ किया कि मोदी ने मुझे राष्ट्रपति बनाने का ऑफर नहीं दिया था। मेरे मन में भी इस तरह का कोई विचार नहीं था। दूसरी ओर पवार के इस खुलासे से भाजपा सकते में है। भाजपा के पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच हुई चर्चा को सार्वजनिक करना कितना उचित है। इस विचार करने वाली बात है। मुनगंटीवार ने दावा किया कि प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में राकांपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के संबंध में एक बार भी चर्चा नहीं हुई थी।  

भाजपा के साथ अजित के सरकार बनाने की नहीं थी जानकारी

राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का शपथ ग्रहण समारोह देखकर आश्चर्य हुआ था। पवार ने कहा कि लोगों को लगता है कि अजित द्वारा भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की जानकारी मुझे थी। अजित के राकांपा विधायकों को तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने का फैसले को मेरा समर्थन था। लेकिन यह पूरी तरह गलत है। मुझे कुछ मालूम नहीं था। हालांकि पवार ने स्वीकार किया कि अजित उनसे पूछकर ही फडणवीस से मिलने गए थे। पवार ने कहा कि मुझे यह नहीं पता था कि दोनों मिलकर सरकार बना लेंगे। पवार ने कहा कि एक दिन अजित ने मुझसे आकर कहा कि मुझे देवेंद्र फडणवीस मिलने के लिए बुला रहे हैं। मैं फडणवीस से मिलने के लिए जाऊं क्या। राजनीति में संवाद बना रहना चाहिए।

इस लिहाज से मैंने अजित को फडणवीस से मिलने के लिए अनुमति दी थी। लेकिन दूसरे दिन 23 नवंबर को फडणवीस और अजित ने शपथ ले ली। अजित ने फडणवीस के सामने 23 नवंबर को ही शपथ लेने की शर्त रखी थी। इस शपथ ग्रहण समारोह को देखकर मुझे आश्चर्य हुआ। लेकिन मुझे एक बात समझ में आ गई कि सरकार कितनी फुर्ती से काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी तेज गति से काम करते हैं। पवार ने कहा कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि सुबह 6 बजे राष्ट्रपति शासन हटाया गया और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने शपथ ली। लेकिन शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद विधायकों का चेहरा देखकर मैंने विचार किया तो ये सभी विधायक हमारे हैं। इसलिए जो हुआ है और हो रहा है, उसको मैं सुधार सकता हूं। इस बात का मुझे पुरा विश्वास था।


अजित ने स्वीकार की चूक- पवार

पवार ने कहा कि उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद दूसरे दिन अजित मेरे पास आए थे। उन्होंने कहा कि मुझसे चूक हुई है। मैंने उनसे कहा कि आपने अक्षम्य गलती की है। इसको माफ नहीं किया जा सकता है।  इसलिए महाराष्ट्र विकास आघाडी की सरकार में अजित को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई गई। क्योंकि मुझे प्रदेश को एक संदेश देना था कि गलती का माफ नहीं करना है। चाहे कोई परिवार का व्यक्ति क्यों न हो।  पवार ने कहा कि पार्टी के विधायक नहीं चाहते थे कि अजित के खिलाफ कोई कार्रवाई हो। इसलिए अजित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहींं की गई।

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