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34 हजार से अधिक श्रमिक लौटे, पंजीयन 16491 का हो पाया

34 हजार से अधिक श्रमिक लौटे, पंजीयन 16491 का हो पाया

रजिस्ट्रेशन में सामने आई नगरीय निकायों की लापरवाही, बिना काम गांवों में भटक रहे
डिजिटल डेस्क कटनी। कोराना संक्रमण के चलते अन्य राज्यों एवं प्रदेश के अन्य जिलों से आए मजदूरों रोजगार उपलब्ध कराने मनरेगा में जॉब कार्ड बनाए जा रहे हैं। वहीं श्रम विभाग के पोर्टल में भी पंजीयन किया गया। पंजीयन का कार्य तीन जून तक चला। जिसमें 16 हजार से अधिक मजदूरों का रजिस्ट्रेशन किया गया। मजदूरों के पंजीयन में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों की लापरवाही सामने आई है। बाहर से आए मजदूरों का डाटा नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायत स्तर पर तैयार किया गया है लेकिन जब शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने उनके पंजीयन का कार्य शुरू हुआ तो 50 फीसदी भी शामिल नहीं हो पाए।  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार इनमें से कई मजदूरों के पहले ही जॉबकार्ड जारी हुए थे। उसी आधार पर कुछ मजदूर मनरेगा में काम भी कर रहे हैं।
एप में खोजेंगे रोजगार
श्रम विभाग के अनुसार अन्य राज्यों से वापस आए कामगारों के पंजीयन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इनकी जानकारी जिला रोजगार कार्यालय सहित जिला पंचायत एवं नगरीय निकायों को भी दी गई है। मजदूरों की रोजगार सेतु एप में जानकारी फीड की जा रही है। कंपनियों से भी किया जा रहा है, ताकि जैसे ही कंपनियां शुरू हों तो मजदूरों को काम दिलाया जा सके। इन मजदूरों को संबल योजना व भवन निर्माण योजना के तहत सहायता मिलेगी। संबल योजना में मृत्यु सहायता, प्रसूति सहायता, आयुष्मान योजना के तहत उपचार, सरल बिजली, अनुग्रह सहायता के अलावा भवन निर्माण के तहत विवाह, प्रसूति सहायता आदि दी जाएगी।
सर्वे में फिसड्डी निकाय
प्रवासी मजदूरों की जानकारी जुटाने से लेकर उनके पंजीयन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तो तत्परता दिखाई पर नगरीय निकाय फिसड्डी साबित हुए। नगर निगम कटनी का तो यह हाल है कि श्रमिकों के पंजीयन में कैमोर से भी पीछे है और यहां मात्र 98 श्रमिकों का पंजीयन किया जा सका है। नगर निगम सहित चारों निकायों में कुल 281 श्रमिकों का पंजीयन हो पाया था। नगर परिषद कैमोर में सबसे अधिक 117, बरही में 50 व विजयराघवगढ़ में 16 मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। नगर निगम को श्रम विभाग द्वारा तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं पर प्रवासी मजदूरों का सर्वे नहीं हो पाया।
सताने लगी रोजगार की चिंता
जनपद पंचायत बड़वारा की ग्राम पंचायत गुढ़ाकला के मंतूराम यादव जैसे सैकड़ों मजदूरों को रोजगार की चिंता सताने लगी है। मंतूराम के अनुसार वह झारखंड के सासानगर में फैक्टरियों में सीमेंट सीट लगाने का काम करता था। दो माह में लॉक डाउन में फंसे रहने के बाद उसके साथ तीन अन्य लोग भी 23 मई को वापस आए थे। पंचायत सचिव ने 30 मई को पंजीयन कर दिया पर रोजगार का अब तक पता नहीं है। उसका छोटा भाई रंजीत भी बड़ोदरा गुजरात से वापस आया चुका है। बड़ा भाई बालाघाट में फंसा है। जमीन भी इतनी नहीं है, जिसे तीनों भाईयों का गुजारा हो सके।
इनका कहना है
प्रवासी मजदूरों का सर्वे कार्य पूर्ण हो गया है। सर्वे के बादद संबल योजना में सभी का पंजीयन हो गया है। अभी तक नगर निगम कटनी द्वारा पोर्टल में जानकारी प्रवासी मजदूरों की नहीं फीड की गई,  जिससे काम रुका है। पंजीकृत श्रमिकों को संबल व भवन निर्माण योजना का लाभ सहित उद्योग शुरू होने पर काम दिलाने की पहल होगी।
- एम.के. गौतम, श्रम पदाधिकारी

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।