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कमल को हराने मैदान में उतरे नाथ, बोले- पब्लिक सेक्टर का निजीकरण करने पर तुली मोदी सरकार 

October 16th, 2019 23:03 IST
कमल को हराने मैदान में उतरे नाथ, बोले- पब्लिक सेक्टर का निजीकरण करने पर तुली मोदी सरकार 

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केंद्र व राज्य सरकार के झूठे आश्वासनों के कारण किसान आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। जिले में कांग्रेस उम्मीदवारों की प्रचार सभा काे संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा कि देश संकट के दौर से गुजर रहा है। सबसे बड़ा संकट विश्वसनीयता का है। सरकार के प्रति सम्मान व विश्वास रखना पड़ा है। लेकिन भाजपा के नेतृत्व की सरकार ने विश्वसनीयता खो दी है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसान आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। कपास, धान उत्पादकों को 5 साल पहले भाजपा ने दिए आश्वासन पूरे नहीं कर पायी है। किसानों को कर्जमाफ करके सातबारा कोरा करने का आश्वासन झूठा निकला है। किसानों का सातबारा कोरा नहीं हुआ है। मौदा के एनटीपीसी प्रकल्प का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने देश में औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर युवाओं को रोजगार देने का काम किया था। तकनीकी विकास हो रहा है। विश्व स्तर पर विकास के अनेक योजनाएं बन रही है। लेकिन भाजपा के नेतृत्व की सरकार विकास के मामले में पिछड़ रही है।

झूठे आश्वासनों के कारण किसान आत्महत्या

कामठी-मौदा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस महाआघाड़ी के उम्मीदवार सुरेश भोयर के चुनाव प्रचार के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सभा का आयोजन मौदा बस स्टैंड के पास किया गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि, कांग्रेस के कार्यकाल में बड़ी संख्या में विकास कार्य किए गए। उन विकास कार्यों की जानकारी कार्यकर्तायों को जनता तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, हमारे समय में किसान, जनता व सभी वर्ग के लोग खुश थे लेकिन, आज की जनता, किसान खुश नहीं हैं। आज की सरकार लोगों पर अन्याय कर रही है। हमारी सरकार आने पर भारी मात्रा में विकास व किसानों के लिए मध्यप्रदेश के चौरई बांध का पानी देने का आश्वासन दिया। सभा में भारतीय कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सुरेश भोयर,  किशोर गजभिये, नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र मुलक, विधायक सुनील केदार, हुकुमचंद आमदरे, तापेश्वर वैद्य, उमेश गभने, तुलसीराम कालमेघ, राजेंद्र लांडे, ज्ञानेश्वर वानखेड़े, विक्की साठवणे, राजेश निनावे और बड़ी संख्या में कांग्रेस के पदाधिकारी, कार्यकर्ता व नागरिक उपस्थित थे।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।