दैनिक भास्कर हिंदी: भ्रष्टाचार के आरोपियों को सजा दिलाने में महाराष्ट्र पीछे,मध्यप्रदेश आगे

December 2nd, 2017

डिजिटल डेस्क, मुंबई । राज्य में साल 2014 से 2016 के बीच भले ही भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आ रही है, पर ऐसे मामलों में पकड़े गए आरोपियों को सजा दिलाने में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सफलता नही मिल रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)-2016 की रिपोर्ट में इस बात खुलासा हुआ है।

सिर्फ 20.7 प्र.श. को ही सजा

साल 2016 में महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े गए सिर्फ 20.7 प्रतिशत लोगों को ही सजा मिल पाई है। जबकि ऐसे मामलों में मध्य प्रदेश में 79.2, बिहार में 72, केरला में 65.3, आंध्रप्रदेश में 62.7 व तेलगाना में 59.50 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को सजा मिली है। भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े गए आरोपियों को सजा दिलाने में महाराष्ट्र सबसे निचले पायदान पर है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक 4436 मामले विभिन्न महाराष्ट्र की अदालतों में प्रलंबित है। 348 मामलों में या तो आरोपी बरी हो गए या फिर उन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया। सिर्फ 91 लोगों को ही  सजा हुई।  रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत एक हजार 316 मामले दर्ज किए गए थे। जबकि साल 2015 में  एक हजार 279 मामले दर्ज हुए और 2016 में यह आकड़ा 1 हजार 16 था। साल 2016 में दर्ज किए गए 25 ऐसे मामले थे जिसमे एसीबी के पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। एसीबी ने 987 मामलों में आरोपपत्र दायर किए। जबकि 997 मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी है। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामलों के निपटारे में होने वाली देरी के चलते ऐसे मामले में आरोपियों को सजा नहीं हो पाती। हमे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अधिक कोर्ट स्थापित करने की जरुरत है। ऐसा प्रयास होना चाहिए की एक साल के अंतराल में मामले का निपटारा हो सके। क्योंकि कई बार देखा गया है कि मामले के निपटारे में देरी के चलते गवाह लापता हो जाते हैं और कुछ की तो मौत हो जाती है। 
भ्रष्टाचार मामले में सजा का प्रमाण-2016
मध्य प्रदेश  79.2 प्रतिशत
बिहार       72
केरल       65.3
आंध्रप्रदेश    62.7
तेलंगाना      59.5
महाराष्ट्र     20.7