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बीमारी का बहाना बनाने वाले कर्मचारियों की खैर नहीं, प्रशासन करेगा बीमारी का पंचनामा

बीमारी का बहाना बनाने वाले कर्मचारियों की खैर नहीं, प्रशासन करेगा बीमारी का पंचनामा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बीमारी के नाम पर घर में आराम फरमाने वाले राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। जिला प्रशासन ने ऐसे कर्मचारियों की बीमारी का पंचनामा (खुलासा) करने का निर्णय लिया है। दिवाली के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी छुट्टी पर जाने से राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी रही। अधिकांश कर्मचारियों ने बीमारी का कारण सामने किया, जबकि प्रशासन को इनकी बीमारी पर यकीन नहीं हो रहा है। 

कर्मचारी छुट्टी पर
 24 अक्टूबर को मतगणना हुई और 27 अक्टूबर को दीपावली थी। अधिकांश कर्मचारियों ने शुक्रवार 25 अक्टूबर की छुट्टी ली आैर एक साथ 5 दिन का आराम मिल गया। कर्मचारियों ने छुट्टी के लिए खुद के या परिवार का वरिष्ठ सदस्य बीमार होने का कारण बताया। बड़े पैमाने पर कर्मचारी छुट्टी पर होने से कामकाज प्रभावित होने के अलावा कार्यालय में भी सूनापन था। कुछ कर्मचारी एक दिन के लिए पहुंचे आैर फिर बीमारी का कारण बताकर छुट्टी पर चले गए। सरकार ने जिला प्रशासन को कृषि विभाग के साथ मिलकर फसल नुकसान का जायजा लेकर पंचनामा बनाने के निर्देश दिए हैं आैर इधर कर्मचारी छुट्टी मना रहे हैं। जिला प्रशासन ने कर्मचारियों की बीमारी को गंभीरता से लेते हुए इसकी तह तक जाने का निर्णय लिया है। 

जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा
सामूहिक रूप से कर्मचारी गैरहाजिर रहने से कामकाज प्रभावित होता है। कर्मचारी खुद के या परिवार के वरिष्ठ सदस्य की बीमारी का बहाना करते हैं। अब ऐसे कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और संतोषजनक नहीं मिलने पर उस दिन की पेमेंट काटी जाएगी। कई कर्मचारी बगैर बताए ही छुट्टी पर चले गए। वर्तमान समय में सेक्शन अधिकारी या वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क करने के कई माध्यम हैं। जैसे मोबाइल से मैसेज करना, वाट्सएप मैसेज या मेल किया जा सकता है। पत्र भी ऑनलाइन भेजा जा सकता है। बगैर सूचना दिए छुट्टी पर गए कर्मचारियों की बीमारी का बारीकी से पंचनामा हो सकता है। कर्मचारियों की छुट्टी का मामला जिलाधीश के पास भेजा जाएगा। इस पर अंतिम निर्णय जिलाधिकारी को ही करना है। बीमारी का पंचनामा करना यानी खुलासा मांगना, वैद्यकीय प्रमाणपत्र, बगैर सूचना दिए गैरहाजिर रहना, छुट्टी पर जाने की वजह का पता करना जैसे काम सेक्शन अधिकारी करेंगे। यहां से रिपाेर्ट निवासी उपजिलाधीश कार्यालय पहुंचेगी। इसके बाद ये मामला जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा।

छुट्टी नामंजूर कर वेतन से पैसा काटा जाएगा
गैरहाजिर कर्मचारियों से छुट्टी पर जाने का कारण पूछा जाएगा। जरूरी प्रमाणपत्र मांगा जाएगा। अधिकारी को सूचना न देने का कारण भी पूछा जाएगा। स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होने पर संबंधित कर्मचारियों की छुट्टी नामंजूर कर छुट्टी का पैसा पेमेंट से काटा जाएगा। बिना वेतन छुट्टी के प्रस्ताव जिलाधीश को भेजे जाएंगे। 
-रवींद्र कुंभारे, प्रभारी निवासी उपजिलाधीश

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।