दैनिक भास्कर हिंदी: किताब में राणे का सिर्फ 25 फीसदी इतिहासः गडकरी

August 16th, 2019

डिजिटल डेस्क, मुंबई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई है कि पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को फिर से मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो आज है वह कल नहीं रहेगा। गडकरी ने कहा कि राणे से मेरे संबंध राजनीति से परे हैं। उनकी आत्मकथा की किताब में राणे का 25 फीसदी ही इतिहास आ सका है। अभी 75 फीसदी बाकी है। पर मैं राणे साहब के जीवन के सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का साक्षी रहा हूं। गडकरी ने कहा कि मेरी शुभाकामनाएं हमेशा उनके साथ रहेंगी। केंद्रीय मंत्री गडकरी शुक्रवार को यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में आयोजित राणे की आत्मकथा ‘झंझावत’ (मराठी) व ‘नो होल्ड बार्ड-मई ईयर इन पालिटिक्स’ (अंग्रेजी) के विमोचन समारोह में बोल रहे थे।  

शिवसेना छोड़ना राणे की बड़ी भूल: पवार

इस मौके पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि राणे ने जीवन में खुब कष्ट सहे। पर संघर्षों से निकल कर अपना मुकाम बनाया। उन्होंने कहा कि एक झोपड़े में रहने वाले व्यक्ति को जब सत्ता मिली तो उन्होंने अपनी योग्यता दिखाई। पवार ने कहा कि राणे बाला साहेब के बेहद विश्वासपात्र लोगों में से एक थे। शिवसेना छोड़ना उनकी बड़ी भूल थी।  

मेरी सफलता का सारा श्रेय बाला साहेब को: राणे

अपनी आत्मकथा के विमोचन के मौके पर राणे ने कहा कि यह मेरे जीवन का महत्वपूर्ण क्षण हैं। मेरी किताब में छपे पवार साहब के लेख को पढ कर मैं खुद को धन्य समझ रहा हूं। राणे ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भावे ने मुझे सबसे पहले आत्मकथा लिखने की सलाह दी थी। किताब लिखते वक्त मैंने काफी सावधानी बरती है। मैंने शिवसेना को बढ़ाने के लिए जो कुछ किया वह अब के शिवसैनिक भूल सकते हैं क्योंकि ये कर्मिशियल शिवसैनिक हैं। यह आश्चर्य की बात है कि वसंत नाईक के दौर में शिवसेना आगे बढ़ी यह बाला साहेब की वजह से संभव हो सका। मेरी सफलता का सारा श्रेय बाला साहेब को है। उन्होंने मुझे भाषण देना सिखाया। उन्होंने मुझे गढ़ा। मैं तो बेहद साधारण घर का था। पर बाला साहेब का अपार स्नेह मिला। मैंने बाला साहेब से कहा कि मैं शिवसेना छोड़ रहा रहा हूं। वे इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन उद्धव ने कहा कि यदि नारायण राणे वापस आए तो मैं घर छोड़ दूंगा। उनको याद कर आंखे नम हो जाती हूं। बाला साहेब की प्रेरणा से ही यह किताब लिख सका। उन्होंने बगैर मांगे सब कुछ दिया। राणे ने कहा कि अभी मेरा समय बर्बाद हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की आत्मकथा के विमोचन के मौके पर राज्य के उच्च शिक्षामंत्री विनोद तावडे, स्कूली शिक्षामंत्री आशिष शेलार, राकांपा सांसद सुनील तटकरे आदि नेता मौजूद रहे।   

किताब में बताई, क्यों छोड़ी शिवसेना 

मराठी और अंग्रेजी में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में राणे ने शिवसेना छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने के कारणों का उल्लेख किया है। राणे ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उद्धव ठाकरे ने बाला साहेब को धमकी दी थी कि यदि राणे को शिवसेना रोका गया तो मैं घर छोड़ कर चला जाऊंगा। उन्होंने यह भी लिखा है कि उद्धव ठाकरे किस तरह से शिवसैनिकों को परेशान करते थे। आत्मकथा में उन्होंने शिवसेना छोड़कर कांग्रेस में जाने और कांग्रेस छोड़ अपनी नई पार्टी महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष की स्थापना के बारे में विस्तार से लिखा है। आत्मकथा में राणे ने बांद्रा उपचुनाव लड़ने और लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव में मिली हार का उल्लेख करते हुए लिखा है कि किस तरह मुझे खत्म करने के लिए कांग्रेस नेताओं ने ही मुझे हराने का कार्य किया। इस प्रसंग में उन्होंने कांग्रेस के उत्तरभारतीय नेता व पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह के प्रति भी नाराजगी जताई है। उपचुनाव में मिली हार के बाद दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात और राहुल द्वारा राणे को विधान परिषद में भेजे जाने के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए राणे ने लिखा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने किस तरह मुझे विधान परिषद में भेजने का विरोध किया।