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तहसील दफ्तरों में बढ़ रही पेंडेन्सी 19 हजार से ज्यादा मामले लंबित

तहसील दफ्तरों में बढ़ रही पेंडेन्सी 19 हजार से ज्यादा मामले लंबित

कई राजस्व अधिकारियों के यहाँ महीनों से नहीं हो रही सुनवाई, 8 सौ प्रकरण तो ऐसे जो 2 साल से हैं लंबित
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
नामांतरण, बँटवारा, सीमांकन और जनता से जुड़े ऐसे कई मामलों के कागज तहसील दफ्तरों में धूल खा रहे हैं। हर दिन राजस्व से जुड़े प्रकरणों का अम्बार कार्यालयों में लग रहा है, लेकिन अधिकारी इन प्रकरणों के निराकरण में संजीदगी नहीं दिखा रहे हैं। यही कारण है कि सभी तहसीलों में पेंडेंसी बढ़कर 19 हजार के पार पहुँच गई है। वहीं इनमें से 8 सौ प्रकरण तो ऐसे हैं जो लगभग 2 साल से लंबित हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि जितने भी अविवादित प्रकरण हैं उनका समय सीमा में निराकरण किया जाए। 
राजस्व न्यायालयों में इस वर्ष लगभग 60 हजार से ज्यादा प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें 15 हजार से ज्यादा प्रकरण ऐसे हैं जो पिछले साल से पेंडिंग हैं। वहीं इस साल भी राजस्व प्रकरणों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। अधिकारियों ने अभी तक 36 हजार से ज्यादा प्रकरण भले ही निराकृत कर दिए हैं फिर भी 19778 प्रकरणों से ज्यादा अभी भी राजस्व अधिकारियों के पास लंबित हैं। इनमें कई मामले तो ऐसे हैं जिनके कागज महीनों से अधिकारियों के पास हैं लेकिन इनमें ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
कहाँ कितने प्रकरण 
 जिले में अतिरिक्त तहसीलदार अधारताल के यहाँ 1033 प्रकरण, तहसीलदार गोरखपुर के पास 1085, तहसीलदार मझौली के यहाँ 1014, तहसीलदार सिहोरा के पास 758, नायब तहसीलदार पनागर के यहाँ 1014, तहसीलदार पनागर के पास 917, अपर कलेक्टर शहर के पास 268 व सभी एसडीएम के पास भी प्रकरण लंबित हैं। 
बिना वजह भटकाते हैं आवेदकों को
 राजस्व के प्रकरणों को लंबित रखने से आवेदक बेवजह भटकते रहते हैं। यही कारण है कि कलेक्ट्रेट और तहसील कार्यालयों में दलाली बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि बिना लेन-देने के तहसीलों में कोई काम नहीं होता। वहीं प्रकरणों की संख्या बढऩे पर तहसीलदार या नायब तहसीलदार भी बेवजह प्रकरणों को रिजेक्ट कर देते हैं ताकि उनके यहाँ पेंडेंसी ज्यादा नजर न आए।
सुनवाई न करने वालों को नोटिस भी थमाया 
 जनता से जुड़े मामलों की सुनवाई न करने वाले एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने नोटिस भी दिए थे। जिन 30 अधिकारियों को नोटिस दिए गए थे उनसे एक सप्ताह में जवाब भी माँगे गए थे कि आखिर क्या वजह है कि उनके इतने मामले लंबित हैं। हालाँकि अभी अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया है। कलेक्टर ने कहा है कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं होंगे तो अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।