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शहर में गड्‌ढों की भरमार, बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने दिए कार्रवाई के आदेश

शहर में गड्‌ढों की भरमार, बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने दिए कार्रवाई के आदेश

डिजिटल डेस्क, नागपु । शहर के गड्‌ढों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए  लेकर बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने  कार्रवाई के आदेश दिए हैं। शहर की सड़कों के गड्ढों को भरने का काम चल रहा है, लेकिन इसके बाद भी स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जगह-जगह गड्ढों की भरमार,  कई जगह डामरीकरण कार्य के बाद भी दोबारा स्थिति वैसी ही बन गई है। संबंधित प्रशासन बारिश के पानी का बहाना बनाकर बचने की कोशिश कर रहा है। हमेशा रहने वाली समस्या बारिश के बाद फिर ठंडे बस्ते में चली जाएगी। बारिश के कारण सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है और गहराई का मालूम नहीं चलता है, जिससे दुर्घटना हो जाती है।

मानस चौक
यहां पुल के पास मंदिर के दोनों ओर के साथ ही कॉटन मार्केट की ओर की सड़क पर हमेशा गड्ढा बना रहता है। सुबह-शाम मार्ग पर भारी ट्राॅफिक रहता है। वाहन चालकों को परेशानी और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है। कार्यकारी अभियंता गिरीश वासनिक ने कहा कि सड़क पर पानी जमा होने के कारण ऐसा होता है। बारिश में गणेश टेकड़ी का पानी सड़क पर आता है, इसकी वजह से ऐसा होता है। हमने उसके लिए अलग से पाइप लाइन डाली है, जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। सड़क पर गट्टू लगाने के प्रस्ताव भी दिया गया है। 

पारडी से भांडेवाड़ी रोड
सड़क पर कई जगह गड्ढे हैं जिससे वहां से निकलने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मनपा के प्रभारी कार्यकारी अभियंता चंद्रकांत गभने ने कहा कि पेंच प्रकल्प की लाइन डालने के कारण वहां गड्डे हो गए है। हमने पेंच प्रकल्प के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा है। पेंच प्रकल्प के राजेश दुपारे  का कहना है कि  उन्होंने फील्ड पर जाकर सारे गड्ढे भर दिए।

मारुति शोरूम से ईटा भट्ठी चौक
 इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बने हुए है। मार्ग पर रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना के शिकार हो जाते है। यहां के कार्यकारी अभियंता महादेव मेश्राम का कहना है कि नागपुर सुधार प्रन्यास ने सड़क को विकसित किया था। भारी ट्रैफिक के साथ ही बड़ी संख्या में सड़क पर ट्रक पार्क रहते है। उनका रिपेयरिंग से लेकर डीजल और आॅइल सड़क पर गिरता है। यह सब सड़क उखड़ने के कारण बनते है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।