दैनिक भास्कर हिंदी: पीएमसी बैंक घोटाला : एचडीआईएल की संपत्ति बेचने हाईकोर्ट ने गठित की तीन सदस्यीय कमेटी

January 16th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  बॉम्बे हाईकोर्ट ने पंजाब महाराष्ट्र को-आपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाले के मामले में गिरवी रखी गई एचडीआईएल की संपत्ति का मूल्यांकन करने व बिक्री के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।  ताकि बैंक से कर्ज के रुप में ली गई रकम की शीघ्रता से वसूली की जा सके। और पैसे न मिलने से परेशान पीएमसी बैंक के खाता धारकों को राहत दी जा सके। तीन सदस्यीय कमेटी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस.राधाकृष्णनन की अध्यक्षता में काम करेगी। 

बुधवार को न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति सुरेंद्र तावडे की खंडपीठ ने पेशे से वकील सरोश दमानिया की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कमेटी गठित करने के संबंध में निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमेटी के दो सदस्यों का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र होंगे। खंडपीठ ने कमेटी को 30 अप्रैल को इस मामले में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

खंडपीठ ने आर्थर रोड जेल के अधीक्षक को इस मामले में गिरफ्तार एचडीआईएल के निदेशक राकेश व सारंग वाधवान को आर्थर रोड जेल से उनके बांद्रा स्थित निवास स्थान पर स्थानांतरति करने को भी कहा है। घर में खंडपीठ ने इन दोनों पर नजर रखने के लिए दो पुलिस कर्मियों को तैनात करने के लिए कहा है। इस तरह से राकेश व सारंग वाधवान अपने घर में नजरबंद रहेंगे। खंडपीठ ने इन दोनों (राकेश व सारंग) को कमेटी को अपनी तरफ से एचडीआईएल की बैंक के पास गिरवी रखी गई संपत्ति के मूल्याकन व बिक्री में पूरा सहयोग देने को कहा है। 

खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में हमे बैंक के खाताधारकों के पीड़ा की चिंता है जिन्होंने अपने जीवन भर की जमा पूंजी बैंक में रखी है। मामले में प्रतिवादी (राकेश व सारंग वाधवान) बैंक में हुए घोटाले के मुख्य सूत्रधार है। क्योंकि इनकी कंपनी एचडीआईएल व अन्य कंपनियों ने बैंक से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है। खंडपीठ ने कहा कि बैंक पहले एचडीआईएल की गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्यांकन करे और फिर उन्हें बेचे।

फिर भी यदि कर्ज की वसूली नहीं हो पाती है तो इसके बाद उन संपत्ति को बेचा जाए जिसके मालिक राकेश व सारंग वाधवान है। पिछले दिनों राकेश व सारंग वाधवान ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर साफ किया था कि यदि उनकी बैंक के पास रखी गई संपति को बेचा जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हलफनामे में उन्होंने अपनी 102 संपत्तियों की जानकारी दी थी। इसमें से 69 अचल संपत्ति है जबकि 33 चल संपत्ति है। गौरतलब है कि मुंबई पुलिस आर्थिक अपराध शाख इस मामले में राकेश व सारंग वाधवान के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था और फिर दोनों को गिरफ्तार किया था। तब से अब तक दोनों जेल में थे। 

  

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